चंद्रयान-2 मिशन के 7 साल, कुछ ऐसा रहा धरती से चाँद तक का सफर

Chandrayaan-2 को साल 2019 में 22 जुलाई को धरती से चंद्रमा की ओर रवाना किया गया था और यह 20 अगस्त को सफलतापूर्वक चंद्रमा की कक्षा में पहुंच गया था। कैसा रहा इसका धरती से चाँद का सफर आइए विस्तार से जानते है...



Chandrayaan-2 Mission in Hindi: 2008 के चंद्रयान-1 के सफल प्रक्षेपण के बाद 2019 में भारत ने चंद्रयान-2 को भी लॉन्च किया और यह काफी हद तक सफल भी रहा, भले ही इसरो का संपर्क अब तक लैंडर से न हो पाया हो पर ऑर्बिटर अब भी चंदमा (Moon) के बारे में हमें महत्वपूर्ण जानकारियाँ और फोटोज दे रहा है। 2026 में इस अभियान के 7 साल पूरे होने जा रहे है।

chandrayaan 2 mission information in hindi
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आप सभी जानते हैं कि सन 2008 में भारत ने अपना पहला चंद्र अभियान (Lunar Mission) शुरू किया था, जिसमें Chandrayaan-1 को चाँद (moon) की कक्षा (Orbit) में भेजने में भारत ने अपने पहले ही कोशिश में सफलता हासिल की थी लेकिन आपको बता दें कि यह यान चंद्रमा पर नहीं उतरा गया था।


Chandrayaan-2 Mission Details in Hindi

Chandrayaan-2 का चंद्रमा की कक्षा में 3 साल पूरा हो चुका है जिसे साल 2019 में 22 जुलाई को धरती से चंद्रमा की ओर रवाना किया गया था तो वहीं 20 अगस्त को यह सफलतापूर्वक चंद्रमा की कक्षा में पहुंच गया था। इसके बाद साल 2020 में इसरो के चेयरमैन के सिवन ने chandrayaan-2 के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी देते हुए कहा कि chandrayaan-2 के ऑर्बिटर ने चांद की कक्षा के 4400 से अधिक चक्कर पूरे कर लिए हैं और इसके सभी उपकरण बिल्कुल सुरक्षित हैं और अच्छे से काम कर रहे हैं।

इतना ही नहीं चंद्रयान-2 में अभी इतना इंधन बचा हुआ है कि वह चांद के अगले 7 साल तक चक्कर लगा सकता है जिससे यह भारत को अगले 7 सालों तक चांद से जुड़ी जानकारियां भेजता रहेगा।

आपको बता दें कि ऑर्बिटर में हाई क्वालिटी कैमरा का इस्तेमाल किया गया है जिसकी मदद से चांद के बाहरी वातावरण और चांद की सतह की जानकारी हासिल की जा सके। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) द्वारा 31 अक्टूबर 2019 (बृहस्पतिवार) को यह पुष्टि की गई है की चंद्रयान-2 के ऑर्बिटर ने करीब 100 किलोमीटर की ऊचाई से चंद्रमा के बाहरी कक्षा में एरगॉन-40 के मौजूद होने की जानकारी दी है।

इसके साथ ही इसरो चेयरमैन सिवन का कहना है कि अमेरिकी स्पेस कंपनी NASA को चांद की कुछ ऐसी तस्वीरें मिली है जिससे यह अंदाजा लगाया जा सकता है कि सॉफ्ट लैंडिंग करते समय जो लेंडर दुर्घटनाग्रस्त हुआ था वह अभी काम कर रहा है। हालांकि इसरो अभी chandrayaan-2 के रोवर प्रज्ञान और लैंडर की चांद की सतह पर तलाश कर रही है।


चंद्रयान-2 मिशन और इसका उद्देश्य क्या है?

Chandrayaan-2 भारत में 10 साल के अंदर चंद्रमा पर जाने वाला दूसरा चंद्र मिशन है। जिसे 22 जुलाई 2019 को आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से दोपहर 2 बजकर 43 मिनिट पर भारत में निर्मित GSLV Mk-III (जीएसएलवी मार्क-III) Rocket द्वारा लॉन्च किया गया था।

अगर इसरो की मानें तो चंद्रयान-2 को चांद पर भेजने का उद्देश्य वहाँ की चट्टानों को देखना और उसमें मैग्निशियम, कैलशियम और आयरन जैसे खनिजों को ढूंढने का प्रयास करना है इसी के साथ साथ चंद्रमा पर पानी के होने के संकेत की तलाश करना और पारा तथा दूसरे धातु खोजना इसका मुख्य मकसद होने वाला है।

चंद्रमा पृथ्वी का निकटतम खगोलीय पिंड है, जिस पर अंतरिक्ष खोज का प्रयास किया जा सकता है। यह आगे दुसरे अंतरिक्ष मिशनों के लिए आवश्यक प्रौद्योगिकियों को चित्रित करने का एक आशाजनक परीक्षण भी है।

चंद्रयान-2 खोज के एक नए युग को बढ़ावा देने, अंतरिक्ष की हमारी समझ को बढ़ाने, प्रौद्योगिकी की प्रगति को प्रोत्साहित करने, वैश्विक गठजोड़ को बढ़ावा देने और खोजकर्ताओं और वैज्ञानिकों की एक भावी पीढ़ी को प्रेरित करने का प्रयास करता है



Chandrayaan-2 कब Launch हुआ था?

आंध्रप्रदेश के श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से चंद्रयान 2 को दिनांक 22 जुलाई 2019 को भारतीय समय के अनुसार दोपहर 2 बजकर 43 मिनट पर सबसे भारी रॉकेट जीएसएलवी-मार्क 3 (बाहुबली) की सहायता से सफलतापूर्वक Launch किया गया था। हालांकि पहले इसे 15 जुलाई को लॉन्च किया जाना था परंतु तकनीकी खराबी होने के कारण इसे 15 जुलाई की रात 1 बजकर 54 मिनिट 36 सेकंड पर रोक दिया गया और वैज्ञानिकों द्वारा इसकी तकनीकी खराबी को चेक किया गया।


इस वजह से Launching में हुई थी देरी:

Chandrayaan-2 के लॉन्चिंग की बात की जाए तो यह पृथ्वी से चंद्रमा की ओर आंध्रप्रदेश के श्रीहरिकोटा से 15 जुलाई को लगभग 2:51AM पर रवाना होना था, जिस समय ज्यादातर भारतीय लोग सो रहे होते है, परन्तु लॉन्चिंग से 56 मिनट 24 सेकंड पहले इसे रोक लिया गया था, वैज्ञानिकों का कहना है कि इस मिशन में कुछ तकनीकी खराबी होने के कारण इसे रोका गया था।

आपको यह भी बता दें की देश के सभी वैज्ञानिकों ने इस फैसले को सही ठहराया है क्योंकि इस चंद्र मिशन में लगभग 1000 करोड़ रुपए लगे हैं, और यहां कोई भी छोटा या बड़ा Risk लेना सही नहीं है, अतः हम तो यही कहेंगे कि यह बहुत अच्छा हुआ क्योंकि इस छोटी सी दिक्कत के कारण आज करोड़ों का नुकसान हो सकता था।


Orbiter, Lander and Rover in Lunar Mission

इस लूनर अभियान में लैंडर, ऑर्बिटर और रोवर के रूप में 3 मॉड्यूल शामिल हैं। लेंडर को “विक्रम” नाम दिया गया है, तो वहीं रोवर का नाम “प्रज्ञान” रखा गया है, जिसका कुल वजन 3.8 टन यानी कि 3800 किलो है। और इस लूनर मिशन की कुल लागत लगभग 1000 करोड रुपए आंकी गयी है।


1. लैंडर: भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) के अनुसार, नए मिशन में एक ऑर्बिटर, एक लैंडर और एक रोवर शामिल होगा। ऑर्बिटर 100 किलोमीटर (62 मील) की ऊँचाई से मैपिंग करेगा, जबकि लैंडर चाँद की सतह पर एक Soft लैंडिंग करेगा और रोवर को बाहर भेज देगा।


2. रोवर: इसरो की माने तो चांद पर लैंडिंग के बाद लैंडर का दरवाजा खुलेगा और रोवर को बाहर निकलने में 4 घंटे तक का समय लगने वाला था और इसके लगभग 15 मिनट के अंदर ही ISRO को लैंडिंग की तस्वीरें भी मिल सकती थी। आपको बता दें रोवर द्वारा ही चंद्रमा के सभी तस्वीरें और वहाँ मौजूद जानकारियों को इसरो तक पहुंचाया जाना था।

Lander Rover and Orbiter in hindi
Lander Rover and Orbiter in hindi

3. ऑर्बिटर: ऑर्बिटर की बात करें तो यह पृथ्वी से सीधे संपर्क बनाने के लिए भेजे जा रहे है जो कि चंद्रमा से 100 KM की ऊँचाई पर चन्द्रमा के चक्कर काटेंगे और उनके द्वारा ही पृथ्वी पर चंद्रमा की पूरी जानकारी मिल पाएगी। अगर इसके कक्षयान की कक्षा में प्रयोग की बात करे तो यह लगभग 1 वर्ष तक कार्यरत रहने वाला है.



कैसा रहा चंद्रयान 2 का सफ़र?

उड़ान भरने के 29 दिन बाद ही चंद्रयान 2 ने चंद्रमा की ओर तेजी से अग्रसर होते हुए 20 अगस्त 2019 को चंद्रमा की कक्षा में प्रवेश कर लिया था, जिसे बहुत तनावपूर्ण माना जा रहा था, लेकिन इसमें भी भारतीय वैज्ञानिकों ने सफलता प्राप्त कर ली है।

वहीं 2 सितंबर 2019 को Chandrayaan-2 से लैंडर और विक्रम सफलतापूर्वक अलग हुए, जिसकी पुष्टि इसरो ने की, इसरो के चेयरमैन के. सिवन ने बताया की 2 सितंबर को दोपहर 1:35 पर लेंडर विक्रम से अलग हो गया। विक्रम से अलग होने के बाद लैंडर को चाँद की सतह पर लैंडिंग करनी थी, तो वहीं ऑर्बिटर को चंद्रमा के चारों ओर चक्कर लगाना था।

ऑर्बिटर तो चाँद की कक्षा में सफलतापूर्वक स्थापित हो गया, लेकिन लैंडर की चाँद पर लैंडिंग योजना के अनुसार नहीं हुई। हालंकि इसका ऑर्बिटर 7 साल तक काम करता रहेगा, ऑर्बिटर ने ही यह जानकारी दी है कि चाँद की बाहरी सतह पर आर्गन 40 मौजूद है, और ऑर्बिटर से ही चाँद की कई तस्वीरें भी ली गई।



कब और कहाँ हुई चन्द्रयान 2 की लैंडिंग?

इसे चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव के पास उतारा जाएगा जहां आज तक दुनिया का कोई भी अंतरिक्ष यान नहीं उतारा गया है, ऐसा माना जा रहा है कि चंद्रमा के उस हिस्से मैं अच्छी लैंडिंग के लिए जितने प्रकाश और समतल जगह की जरूरत होती है वह Chandrayaan-2 को उस हिस्से में मिलने वाली है और इस मिशन के लिए पर्याप्त ऊर्जा की जरूरत है वह चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव में ही मिल सकती है।

7 सितंबर 2019 को लैंडर को चाँद की सतह पर सॉफ्ट लैंडिंग कराते समय विक्रम से संपर्क टूट गया और लैंडिंग हार्ड होने के कारण इसे काफी नुकसान पहुंचा है। आपको बता दें कि प्लान के अनुसार लैंडर को चाँद के दक्षिणी हिस्से में लैंड करा कर Rover को चाँद की सतह पर 14 दिन तक काम करने के लिए उतारना था, यह 14 दिन चाँद पर 1 दिन के बराबर है।


चंद्रयान-1 के बारे में कुछ महत्वपूर्ण जानकारी? (1st Lunar Mission)

चंद्रयान-1 2008 भारत द्वारा चंद्रमा पर जाने वाला पहला चन्द्र मिशन (Lunar Mission) था. ये मिशन 22 अक्टूबर 2008 से चलकर सितंबर 2009 यानि की लगभग एक साल तक चला था। वही Chandrayaan-1 को 22 October 2008 को श्रीहरिकोटा के सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से ही अंतरिक्ष में भेजा गया था।

Chandrayaan-1 ने 08 नवंबर 2008 यानि की लगभग 17 दिन में ही चंद्रमा पर पहुचने में सफलता प्राप्त की थी. इस चंद्रयान ने चंद्रमा की कक्षा में 312 दिन बिताए थे। इसी मिशन में चन्द्रमा पर पानी होने के भी संकेत मिले थे।

ISRO के चेयरमैन जी माधवन नायर (G.Madhavan Nair) ने उस समय यह भी बताया था कि चंद्रयान का मिशन चंद्रमा के कक्ष में जाना था चन्द्रमा पर नहीं, और उसे चंद्रमा के कक्ष में ही कुछ मशीनरी स्थापित करनी और भारत का झंडा लगाना था।


चंद्रयान 2 को चाँद पर जाने में कितना समय लगा?

पृथ्वी और चाँद के बीच की दूरी लगभग 3,84,000 किमी हैं, और चंद्रयान को यह सफर तय करने में लगभग 50 दिनों का समय लगा। 22 जुलाई 2019 को लॉन्च किए जाने के बाद यह चाँद पर 7 सितम्बर 2019 को चन्द्रमा की सतह पर उतरते समय दुर्घटनाग्रस्त हो गया था।


चंद्रयान मिशन-2 से भारत और दुनिया को कैसे फायदा देगा?

इस मिशन का मकसद चाँद पर जीवन की सम्भावनाओं की तलाश के लिए वहाँ के धरातल तथा वहाँ पानी की मात्रा को समझने के साथ ही, वहां मौजूद विभिन्न धातुओं का अध्यन करना करना अथवा पता लगाना है। इसके आलावा इस अभियान के साथ ही भारत दुनिया में अपना Space Foot Prints बढ़ाना चाहता है। अमेरिका, चीन, जापान पहले से ही चाँद पर अपना परचम लहरा चुके है, ऐसे में भारत भी चंद्रयान भेजकर ऐसा करने वाला चौथा देश बन जाएगा।


क्या चन्द्रमा पर जीवन संभव है?

अब तक, किसी भी चंद्र मिशन ने चंद्रमा पर जीवन की उपस्थिति के किसी भी संकेत का पता नहीं लगाया है। लकिन चंद्रयान 1 मिशन द्वारा वहाँ पानी के संकेतो का पता चला था। हालांकि चंद्रमा पर तापमान चरम सीमा से गुजरता है – सूर्य का प्रकाश पाने वाला इलाका लगभग 130 डिग्री सेल्सियस तक गर्म हो जाता है, और रात के दौरान -180 डिग्री सेल्सियस तक ठंडा हो जाता है।



Sandeep Kumar

संदीप, HindiGyanStudio.Com के प्रमुख लेखक हैं, वे अक्सर इस पर महत्वपूर्ण दिवसों, जयंती, त्योहारों और अन्य जरुरी विषयों पर जानकारी अपडेट करते हैं। उनके पास कंटेंट लेखन में 5 सालों से अधिक का अनुभव है, वे इससे पहले कई वेबसाइट्स पर आर्टिकल लिखते रहे है।

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