Ekadashi Vrat March 2026: कब है पापमोचनी और कामदा एकादशी व्रत? जानें सही तारीख, मुहूर्त, पारण, पूजा विधि और महत्व

मार्च 2026 का महीना भक्तों के लिए बेहद खास होने वाला है! इस बार चैत्र मास में पड़ रही हैं दो अत्यंत पुण्यदायी एकादशी – पापमोचनी और कामदा एकादशी। कहा जाता है कि इन व्रतों को सही तिथि और मुहूर्त में करने से पापों का नाश होता है और मनोकामनाएं पूरी होती हैं। लेकिन क्या…



Ekadashi Vrat March 2026: मार्च 2026 का महीना धार्मिक दृष्टि से बेहद खास रहने वाला है। इस महीने चैत्र मास की शुरुआत के साथ ही हिंदू नववर्ष का शुभारंभ भी होता है। ऐसे पवित्र समय में पड़ने वाली पापमोचनी एकादशी और कामदा एकादशी का महत्व कई गुना बढ़ जाता है। हिंदू धर्म में हर महीने कृष्ण पक्ष और शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को व्रत रखा जाता है, लेकिन चैत्र मास की एकादशी को विशेष फलदायी माना गया है।

Ekadashi Vrat March 2026 Papmochani and Kamada Ekadashi Date
Ekadashi Vrat March 2026 Papmochani and Kamada Ekadashi Date

मार्च 2026 में पापमोचनी एकादशी 15 मार्च और कामदा एकादशी 29 मार्च को पड़ रही है। दोनों ही एकादशियां अत्यंत पुण्यदायी और फलदायी मानी जाती हैं। सही तिथि, मुहूर्त और विधि से व्रत करने पर व्यक्ति को आध्यात्मिक उन्नति, पापों से मुक्ति और सुख-समृद्धि का आशीर्वाद प्राप्त होता है।

अगर आप भी जानना चाहते हैं कि मार्च 2026 में एकादशी कब है, सही तिथि क्या है, पारण का समय क्या रहेगा और व्रत की पूजा विधि कैसे करें, तो इस लेख में आपको सारी जानकारी सरल और स्पष्ट भाषा में मिलेगी।


मार्च 2026 में कब है पापमोचनी एकादशी? (Papmochani Ekadashi 2026 Date)

चैत्र माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी को पापमोचनी एकादशी कहा जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार यह व्रत अनजाने में हुए पापों से मुक्ति दिलाने वाला माना गया है।

द्रिक पंचांग के अनुसार:

  • एकादशी तिथि की शुरुआत: 14 मार्च 2026, सुबह 8:10 बजे
  • तिथि का समापन: 15 मार्च 2026, सुबह 9:16 बजे

हिंदू धर्म में उदयातिथि को महत्व दिया जाता है, इसलिए पापमोचनी एकादशी का व्रत 15 मार्च 2026, रविवार को रखा जाएगा।

पापमोचनी एकादशी पारण समय 2026

व्रत का पारण द्वादशी तिथि पर किया जाता है।
पारण का शुभ समय: 16 मार्च 2026, सुबह 6:30 बजे से 8:54 बजे तक

इस समय के बीच व्रत खोलना शुभ और फलदायी माना गया है।


मार्च 2026 में कब है कामदा एकादशी? (Kamada Ekadashi 2026 Date)

चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी को कामदा एकादशी कहा जाता है। शास्त्रों में इसे मनोकामना पूर्ण करने वाली एकादशी बताया गया है। मान्यता है कि इस दिन श्री हरि की सच्चे मन से पूजा करने से जीवन के कष्ट दूर होते हैं और सुख-समृद्धि का आशीर्वाद मिलता है।

द्रिक पंचांग के अनुसार:

  • एकादशी तिथि प्रारंभ: 28 मार्च 2026, सुबह 8:45 बजे
  • तिथि समाप्ति: 29 मार्च 2026, सुबह 7:46 बजे

उदयातिथि के अनुसार कामदा एकादशी का व्रत 29 मार्च 2026, रविवार को रखा जाएगा।

कामदा एकादशी पारण समय 2026

व्रत का पारण 30 मार्च 2026 को किया जाएगा।
शुभ पारण मुहूर्त: सुबह 6:14 बजे से 7:09 बजे तक

समय का विशेष ध्यान रखना चाहिए, क्योंकि सही समय पर पारण करने से व्रत का पूरा फल प्राप्त होता है।


चैत्र मास की एकादशी का विशेष महत्व

चैत्र मास को हिंदू पंचांग का पहला महीना माना जाता है। इसी महीने से नवसंवत्सर की शुरुआत होती है। इसलिए इस माह में आने वाली पापमोचनी और कामदा एकादशी का धार्मिक महत्व और भी अधिक बढ़ जाता है।

शास्त्रों के अनुसार:

  • एकादशी के दिन भगवान विष्णु की पूजा करने से पापों का नाश होता है।
  • पवित्र नदियों में स्नान करने से पुण्य फल की प्राप्ति होती है।
  • व्रत रखने से आत्मिक शुद्धि और मानसिक शांति मिलती है।
  • परिवार में सुख-समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा का वास होता है।

ऐसा माना जाता है कि जो व्यक्ति नियमित रूप से एकादशी का व्रत रखता है, उसे मोक्ष की प्राप्ति का मार्ग प्रशस्त होता है।


पापमोचनी एकादशी का धार्मिक महत्व

पापमोचनी शब्द का अर्थ है – पापों को नष्ट करने वाली। मान्यता है कि इस दिन व्रत और पूजा करने से व्यक्ति के जाने-अनजाने में किए गए पापों का प्रायश्चित हो जाता है। भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की विधिपूर्वक पूजा करने से जीवन में चल रही परेशानियां धीरे-धीरे समाप्त होने लगती हैं।

कई धार्मिक कथाओं में उल्लेख मिलता है कि इस व्रत के प्रभाव से साधक को आध्यात्मिक उन्नति मिलती है और उसका मन भक्ति में स्थिर होता है।


कामदा एकादशी का धार्मिक महत्व

कामदा एकादशी को विशेष रूप से मनोकामना पूर्ण करने वाली एकादशी कहा गया है। “कामदा” का अर्थ है इच्छाओं को पूरा करने वाली। इस दिन श्री हरि की पूजा करने से जीवन के दुख, क्लेश और बाधाएं दूर होती हैं।

ऐसा भी कहा जाता है कि इस व्रत के प्रभाव से व्यक्ति को पितृ दोष, कष्ट और मानसिक तनाव से मुक्ति मिल सकती है। घर में सुख-शांति और आर्थिक स्थिरता आती है। जो दंपत्ति संतान सुख की कामना करते हैं, वे भी इस व्रत को श्रद्धा से करते हैं।


एकादशी व्रत पूजा विधि (Ekadashi Puja Vidhi in Hindi)

एकादशी व्रत की पूजा विधि सरल है, लेकिन इसे श्रद्धा और नियमों के साथ करना चाहिए।

सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें। यदि संभव हो तो गंगा जल मिलाकर स्नान करना शुभ माना जाता है। स्नान के बाद सूर्य देव को अर्घ्य दें और व्रत का संकल्प लें।

घर के मंदिर की साफ-सफाई करें। एक चौकी पर पीला कपड़ा बिछाकर भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें। उन्हें चंदन का तिलक लगाएं और पीले फूल अर्पित करें।

घी का दीपक जलाएं और धूप अर्पित करें। इसके बाद विष्णु सहस्रनाम या एकादशी व्रत कथा का पाठ करें। भोग में फल, मिष्ठान या पंचामृत अर्पित किया जा सकता है। दिन भर भजन-कीर्तन और भगवान के नाम का स्मरण करें।

अगले दिन द्वादशी तिथि पर नियत समय में व्रत का पारण करें। जरूरतमंद लोगों को अन्न, वस्त्र या धन का दान करना शुभ माना गया है।


एकादशी व्रत में क्या करें और क्या न करें

एकादशी के दिन सात्विकता का विशेष ध्यान रखना चाहिए। इस दिन लहसुन, प्याज, चावल और मांस-मदिरा का सेवन वर्जित माना गया है। बाल और नाखून काटने से भी बचना चाहिए।

मन में नकारात्मक विचार न लाएं और क्रोध से दूर रहें। व्रत केवल भोजन त्यागने का नाम नहीं है, बल्कि मन, वाणी और कर्म की शुद्धि भी जरूरी है।


एकादशी व्रत के आध्यात्मिक और वैज्ञानिक लाभ

धार्मिक मान्यता के अलावा वैज्ञानिक दृष्टिकोण से भी एकादशी व्रत लाभकारी माना जाता है। महीने में दो बार उपवास करने से पाचन तंत्र को आराम मिलता है और शरीर डिटॉक्स होता है। मानसिक रूप से भी उपवास एकाग्रता बढ़ाने में सहायक होता है।

आध्यात्मिक रूप से यह व्रत व्यक्ति को अनुशासन और संयम का पाठ सिखाता है। नियमित रूप से व्रत करने से आत्मविश्वास और सकारात्मक सोच में वृद्धि होती है। अगर आप भी जीवन में शांति, समृद्धि और सकारात्मक बदलाव चाहते हैं, तो श्रद्धा और नियमपूर्वक इन एकादशियों का व्रत अवश्य रखें।



अस्वीकरण: इस लेख में दी गई जानकारी विभिन्न धार्मिक ग्रंथों, पंचांग, मान्यताओं और ज्योतिषीय स्रोतों पर आधारित सामान्य सूचना है। कृपया इसे अंतिम सत्य या दावा न मानें। किसी भी धार्मिक अनुष्ठान से पहले अपने विवेक और आवश्यकता अनुसार विशेषज्ञ की सलाह अवश्य लें। हम अंधविश्वास का समर्थन नहीं करते।


Sandeep Kumar

संदीप, HindiGyanStudio.Com के प्रमुख लेखक हैं, वे अक्सर इस पर महत्वपूर्ण दिवसों, जयंती, त्योहारों और अन्य जरुरी विषयों पर जानकारी अपडेट करते हैं। उनके पास कंटेंट लेखन में 5 सालों से अधिक का अनुभव है, वे इससे पहले कई वेबसाइट्स पर आर्टिकल लिखते रहे है।