International E-Waste Day 2026: 14 अक्टूबर को क्यों मनाया जाता है ई-कचरा दिवस? जानिए थीम और इतिहास

क्या आप भी पुराने चार्जर, खराब ईयरफोन, USB केबल और छोटे इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स को बेकार समझकर कूड़े में फेंक देते हैं? सावधान! ये चीजें भी ई-कचरे का हिस्सा हैं और गलत तरीके से निपटाने पर पर्यावरण को नुकसान पहुंचा सकती हैं। 14 अक्टूबर को मनाए जाने वाले International E-Waste Day 2026 की थीम “Fast Tech:…



International E-Waste Day 2026: आज के डिजिटल दौर में मोबाइल फोन, लैपटॉप, ईयरफोन, चार्जर और दूसरे इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स हमारी जिंदगी का अहम हिस्सा बन चुके हैं। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि खराब होने या पुराने पड़ जाने के बाद इन उपकरणों का क्या होता है? अक्सर लोग इन्हें घर की किसी दराज में रख देते हैं या सामान्य कचरे के साथ फेंक देते हैं। यही लापरवाही धीरे-धीरे पर्यावरण और मानव स्वास्थ्य के लिए गंभीर समस्या बन सकती है।

International E-Waste Day 2026: 14 अक्टूबर को क्यों मनाया जाता है ई-कचरा दिवस? जानिए थीम और इतिहास
International E-Waste Day 2026: 14 अक्टूबर को क्यों मनाया जाता है ई-कचरा दिवस? जानिए थीम और इतिहास

इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों से निकलने वाले इस कचरे को ई-कचरा (E-Waste) कहा जाता है। इसकी बढ़ती मात्रा और सही तरीके से रीसाइक्लिंग की जरूरत के बारे में जागरूकता फैलाने के लिए हर साल 14 अक्टूबर को अंतर्राष्ट्रीय ई-कचरा दिवस (International E-Waste Day) मनाया जाता है।

साल 2026 में इस दिवस का नौवां संस्करण आयोजित किया जाएगा। इस बार विशेष ध्यान छोटे और सस्ते इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों पर है, जिन्हें लोग अक्सर इस्तेमाल करने के बाद बिना सोचे-समझे फेंक देते हैं। आइए जानते हैं International E-Waste Day 2026 की तारीख, थीम, इतिहास, महत्व, ई-कचरे के खतरों और भारत में इसके प्रबंधन से जुड़ी जरूरी बातें।


अंतर्राष्ट्रीय ई-अपशिष्ट दिवस 2026 कब मनाया जाएगा?

अंतर्राष्ट्रीय ई-कचरा दिवस हर साल 14 अक्टूबर को मनाया जाता है। वर्ष 2026 में यह बुधवार को मनाया जाएगा।

इस दिवस की शुरुआत वर्ष 2018 में WEEE Forum यानी Waste Electrical and Electronic Equipment Forum ने की थी। इसका मुख्य उद्देश्य इलेक्ट्रॉनिक कचरे के सही संग्रह, सुरक्षित निपटान और रीसाइक्लिंग के प्रति लोगों को जागरूक करना है।

आज इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की मांग तेजी से बढ़ रही है। तकनीक में बदलाव के कारण लोग पुराने उपकरणों की जगह नए मॉडल खरीद लेते हैं। इससे बड़ी मात्रा में ऐसे उत्पाद जमा होते हैं जिन्हें दोबारा इस्तेमाल किया जा सकता है या जिनसे उपयोगी सामग्री निकालकर रीसाइक्लिंग की जा सकती है।

अंतर्राष्ट्रीय ई-कचरा दिवस लोगों, कंपनियों, खुदरा विक्रेताओं और सरकारों को इस समस्या से निपटने के लिए जिम्मेदार कदम उठाने का संदेश देता है।


International E-Waste Day 2026 की थीम क्या है?

International E-Waste Day 2026 की थीम है: “Fast Tech: Don’t bin it, bring it in” इसका हिंदी में अर्थ है: “तेजी से बढ़ते इलेक्ट्रॉनिक उत्पादों को कूड़ेदान में न फेंकें, उन्हें रीसाइक्लिंग के लिए वापस जमा करें।”

इस थीम का मुख्य फोकस छोटे और सस्ते इलेक्ट्रॉनिक उत्पादों पर है, जिन्हें खरीदना आसान होता है, लेकिन खराब होने के बाद लोग अक्सर उनका सही निपटान नहीं करते।

क्या है Fast Tech?

Fast Tech उन छोटे, कम कीमत वाले इलेक्ट्रॉनिक और इलेक्ट्रिकल उत्पादों को कहा जाता है, जिन्हें लोग आसानी से खरीद लेते हैं और कई बार थोड़े समय बाद इस्तेमाल करना बंद कर देते हैं। यह अवधारणा Fast Fashion से मिलती-जुलती है, जहां कम कीमत और तेजी से बदलते ट्रेंड के कारण उत्पादों की खपत और बर्बादी बढ़ती है।

Fast Tech के कुछ उदाहरण हैं:

  • ईयरफोन और छोटे हेडफोन
  • USB केबल, चार्जिंग केबल और एडॉप्टर
  • छोटे USB गैजेट्स और मिनी फैन
  • LED सजावटी लाइट्स
  • इलेक्ट्रॉनिक खिलौने
  • छोटी बैटरी से चलने वाली डिवाइस
  • कुछ प्रकार के छोटे इलेक्ट्रॉनिक घरेलू उपकरण

इनमें से कई उत्पाद खराब होने के बाद सामान्य कचरे में फेंक दिए जाते हैं या लंबे समय तक घरों में पड़े रहते हैं। जबकि इनमें मौजूद इलेक्ट्रॉनिक सर्किट, धातु, प्लास्टिक और बैटरी जैसी सामग्री को उचित व्यवस्था के तहत संभालने की जरूरत होती है।

2026 की थीम का संदेश साफ है: छोटे इलेक्ट्रॉनिक उत्पाद भी ई-कचरा हैं। इन्हें सामान्य कूड़ेदान में डालने के बजाय अधिकृत संग्रह केंद्र या उचित रीसाइक्लिंग व्यवस्था तक पहुंचाना चाहिए।


अंतर्राष्ट्रीय ई-कचरा दिवस का इतिहास

अंतर्राष्ट्रीय ई-कचरा दिवस की शुरुआत वर्ष 2018 में WEEE Forum द्वारा की गई थी। इस पहल का उद्देश्य दुनिया भर में तेजी से बढ़ रहे इलेक्ट्रॉनिक कचरे की समस्या को सामने लाना और लोगों को इसके जिम्मेदार प्रबंधन के लिए प्रेरित करना था।

WEEE Forum की स्थापना वर्ष 2002 में यूरोप के छह देशों—ऑस्ट्रिया, नीदरलैंड, बेल्जियम, नॉर्वे, स्विट्जरलैंड और स्वीडन—के संगठनों ने मिलकर की थी। यह संगठन इलेक्ट्रिकल और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के कचरे के संग्रह तथा प्रबंधन से जुड़ी गतिविधियों को बढ़ावा देता है।

पहली बार 2018 में मनाए जाने के बाद अंतर्राष्ट्रीय ई-कचरा दिवस एक वैश्विक जागरूकता पहल के रूप में विकसित हुआ। इसमें विभिन्न देशों के संगठन, रीसाइक्लिंग संस्थाएं, निर्माता, खुदरा विक्रेता और पर्यावरण से जुड़े समूह भाग लेते हैं।

WEEE Forum के अनुसार, 2025 के आयोजन में छह महाद्वीपों के 50 देशों से 140 से अधिक संगठनों ने हिस्सा लिया था। इस पहल का उद्देश्य केवल ई-कचरे के बारे में जानकारी देना नहीं, बल्कि लोगों को पुराने उपकरणों को सही तरीके से वापस जमा करने और रीसाइक्लिंग के लिए प्रेरित करना भी है।

वर्ष 2026 में इसका नौवां संस्करण छोटे और कम कीमत वाले इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के जिम्मेदार प्रबंधन पर विशेष ध्यान दे रहा है।


ई-कचरा क्या है और यह कैसे बढ़ रहा है?

ई-कचरा उन इलेक्ट्रिकल और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों को कहा जाता है जिन्हें उनके मालिक इस्तेमाल करना बंद कर देते हैं या जिन्हें अब उपयोगी नहीं माना जाता। इसमें खराब, पुराने या बेकार हो चुके उपकरण और उनके कुछ हिस्से शामिल हो सकते हैं।

मोबाइल फोन, कंप्यूटर, प्रिंटर, टेलीविजन, रेफ्रिजरेटर, चार्जर, केबल और कई अन्य इलेक्ट्रॉनिक उत्पाद इस्तेमाल के बाद ई-कचरे का हिस्सा बन सकते हैं।

ई-कचरा बढ़ने के पीछे कई कारण हैं। तकनीक तेजी से बदलती है, नए मॉडल बार-बार बाजार में आते हैं और कई छोटे उपकरणों की कीमत इतनी कम होती है कि लोग उनकी मरम्मत कराने के बजाय नया उत्पाद खरीदना पसंद करते हैं। इसके अलावा, ऑनलाइन खरीदारी से इलेक्ट्रॉनिक सामान आसानी से उपलब्ध हो जाता है।

कई बार पुराने उपकरण काम करने की स्थिति में होते हैं, लेकिन नए मॉडल खरीदने के कारण उन्हें इस्तेमाल करना बंद कर दिया जाता है। यदि ऐसे उपकरणों की मरम्मत, दोबारा इस्तेमाल या सही रीसाइक्लिंग नहीं होती, तो वे पर्यावरणीय समस्या को बढ़ा सकते हैं।


दुनिया में ई-कचरे की समस्या कितनी गंभीर है?

ई-कचरा दुनिया में तेजी से बढ़ने वाली अपशिष्ट धाराओं में से एक है। संयुक्त राष्ट्र से जुड़े Global E-waste Monitor 2024 के अनुसार, वर्ष 2022 में दुनिया भर में लगभग 62 मिलियन टन ई-कचरा उत्पन्न हुआ था। इसमें से केवल लगभग 22.3 प्रतिशत ई-कचरे को औपचारिक रूप से दस्तावेजीकृत संग्रह और रीसाइक्लिंग के माध्यम से संभाला गया था।

यह आंकड़ा दिखाता है कि इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की खपत जिस गति से बढ़ रही है, उस गति से उनका औपचारिक संग्रह और रीसाइक्लिंग नहीं बढ़ पा रहा है।

ई-कचरे की बढ़ती मात्रा के पीछे तकनीकी प्रगति, शहरीकरण, आर्थिक विकास और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की कम होती कीमत जैसे कई कारण हैं। छोटे गैजेट्स भी इस समस्या में योगदान देते हैं, क्योंकि लोग अक्सर उन्हें सामान्य कचरे की तरह समझ लेते हैं।

जब ई-कचरे को सही तरीके से इकट्ठा और संसाधित नहीं किया जाता, तो उसमें मौजूद उपयोगी सामग्री भी बर्बाद होती है। दूसरी ओर, गलत तरीके से निपटान करने पर पर्यावरण को नुकसान पहुंचने का खतरा बढ़ सकता है।


ई-कचरा पर्यावरण और स्वास्थ्य के लिए खतरनाक क्यों है?

इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों में कई प्रकार की सामग्री इस्तेमाल होती है। इनमें कुछ उपयोगी धातुएं होती हैं, जबकि कुछ उपकरणों में सीसा, पारा और कैडमियम जैसे खतरनाक पदार्थ भी मौजूद हो सकते हैं। इन पदार्थों का जोखिम उपकरण के प्रकार और उसमें इस्तेमाल किए गए घटकों पर निर्भर करता है।

1. मिट्टी और पानी का प्रदूषण

जब इलेक्ट्रॉनिक कचरे को खुले में फेंक दिया जाता है या असुरक्षित तरीके से तोड़ा जाता है, तो उसमें मौजूद कुछ हानिकारक पदार्थ मिट्टी और पानी तक पहुंच सकते हैं। इससे स्थानीय पर्यावरण और जीव-जंतुओं पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने का खतरा रहता है।

2. हवा में जहरीले प्रदूषक

ई-कचरे को खुले में जलाने या असुरक्षित तरीके से गर्म करने पर हानिकारक धुआं और प्रदूषक निकल सकते हैं। इससे आसपास रहने वाले लोगों और काम करने वाले कर्मचारियों के स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ सकता है।

3. मानव स्वास्थ्य पर प्रभाव

सीसा, पारा और कैडमियम जैसे कुछ पदार्थों के संपर्क में आने से स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं हो सकती हैं। जोखिम इस बात पर निर्भर करता है कि व्यक्ति किस पदार्थ के संपर्क में आया, कितनी मात्रा में और कितने समय तक संपर्क बना रहा।

इसी कारण ई-कचरे को सामान्य घरेलू कचरे के साथ फेंकने, खुले में जलाने या बिना सुरक्षा के खोलने से बचना चाहिए।

4. उपयोगी संसाधनों की बर्बादी

इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों में तांबा, एल्युमिनियम, सोना और अन्य उपयोगी सामग्री हो सकती है। उचित रीसाइक्लिंग के माध्यम से इनमें से कुछ सामग्री को दोबारा प्राप्त किया जा सकता है।

यदि उपकरणों को गलत तरीके से फेंक दिया जाए, तो इन संसाधनों का नुकसान होता है और नए कच्चे माल की मांग बढ़ सकती है।


भारत में ई-कचरे की स्थिति और भूमिका

भारत दुनिया के प्रमुख इलेक्ट्रॉनिक उपकरण बाजारों में से एक है। मोबाइल फोन, कंप्यूटर, टीवी और दूसरे इलेक्ट्रॉनिक उत्पादों के व्यापक उपयोग के कारण देश में ई-कचरे का प्रबंधन एक महत्वपूर्ण पर्यावरणीय विषय बन गया है।

भारत में ई-कचरे के प्रबंधन के लिए पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय तथा केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। नियमों के तहत उत्पादकों, रीसाइक्लरों और अन्य संबंधित पक्षों की जिम्मेदारियां निर्धारित की जाती हैं।

भारत में ई-कचरा प्रबंधन के नियम

भारत ने ई-अपशिष्ट (प्रबंधन) नियम, 2016 अधिसूचित किए थे। इन नियमों में विस्तारित उत्पादक उत्तरदायित्व (Extended Producer Responsibility – EPR) को महत्वपूर्ण स्थान दिया गया।

EPR का मूल विचार यह है कि इलेक्ट्रॉनिक उत्पाद बनाने या बाजार में लाने वाले उत्पादकों की जिम्मेदारी केवल उत्पाद बेचने तक सीमित नहीं होनी चाहिए। नियमों के अनुसार, उन्हें उत्पाद के उपयोग के बाद उत्पन्न होने वाले कचरे के संग्रह और प्रबंधन से जुड़ी निर्धारित जिम्मेदारियां भी निभानी होती हैं।

इसके बाद भारत में ई-कचरा प्रबंधन के नियमों को संशोधित किया गया। ई-अपशिष्ट (प्रबंधन) नियम, 2022, जो 1 अप्रैल 2023 से लागू हुए, ने पहले के नियमों का स्थान लिया। इसलिए वर्तमान नियमों और जिम्मेदारियों की जानकारी के लिए नवीनतम सरकारी अधिसूचनाओं को देखना जरूरी है।

भारतीय नागरिक क्या कर सकते हैं?

ई-कचरे को कम करने में केवल सरकार और कंपनियों की भूमिका नहीं है। आम नागरिक भी छोटे-छोटे कदम उठाकर योगदान दे सकते हैं।

  • खराब मोबाइल, चार्जर, केबल और ईयरफोन को सामान्य कचरे में न फेंकें।
  • पुराने लेकिन काम करने वाले उपकरणों को सुरक्षित तरीके से दोबारा इस्तेमाल या दान करने पर विचार करें।
  • खराब उपकरणों को अधिकृत ई-कचरा संग्रह केंद्र या पंजीकृत रीसाइक्लर तक पहुंचाएं।
  • नए उपकरण खरीदने से पहले पुराने उपकरण की मरम्मत की संभावना देखें।
  • इलेक्ट्रॉनिक उत्पाद खरीदते समय उनकी टिकाऊपन, मरम्मत की सुविधा और निर्माता की टेक-बैक व्यवस्था पर ध्यान दें।
  • बैटरी वाले उपकरणों को सामान्य कचरे में डालने से बचें और उनके लिए उपलब्ध उचित संग्रह व्यवस्था का इस्तेमाल करें।

ई-कचरे को संभालते समय उपकरणों को खुद खोलकर उनमें से धातु निकालने या बैटरी को नुकसान पहुंचाने की कोशिश न करें। इससे चोट लगने, आग लगने या खतरनाक पदार्थों के संपर्क में आने का जोखिम हो सकता है।


ई-कचरे की रीसाइक्लिंग क्यों जरूरी है?

ई-कचरे की रीसाइक्लिंग का मतलब है पुराने इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों से उपयोगी सामग्री को सुरक्षित तरीके से अलग करना और जहां संभव हो, उसका दोबारा इस्तेमाल करना। यह प्रक्रिया प्रशिक्षित और उचित व्यवस्था वाले रीसाइक्लिंग केंद्रों में की जानी चाहिए।

रीसाइक्लिंग के कई लाभ हैं।

प्राकृतिक संसाधनों की बचत: इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों से कुछ धातुओं और अन्य सामग्रियों को दोबारा प्राप्त करने से नए कच्चे माल की जरूरत कम हो सकती है।

प्रदूषण का जोखिम कम करना: उचित संग्रह और प्रसंस्करण से खतरनाक पदार्थों के मिट्टी, पानी और हवा में फैलने की आशंका घटाई जा सकती है।

सर्कुलर इकॉनमी को बढ़ावा: मरम्मत, दोबारा इस्तेमाल और रीसाइक्लिंग से उत्पादों तथा सामग्रियों का उपयोगी जीवन बढ़ाया जा सकता है।

रोजगार के अवसर: औपचारिक संग्रह, मरम्मत और रीसाइक्लिंग से जुड़े क्षेत्रों में कुशल कामगारों और तकनीकी विशेषज्ञों की जरूरत होती है।

हालांकि, रीसाइक्लिंग तभी प्रभावी होती है जब कचरे को सही तरीके से एकत्र किया जाए और उसका प्रसंस्करण पर्यावरण तथा श्रमिकों की सुरक्षा को ध्यान में रखकर किया जाए।


International E-Waste Day 2026 कैसे मनाया जा सकता है?

अंतर्राष्ट्रीय ई-कचरा दिवस के अवसर पर स्कूल, कॉलेज, कंपनियां, स्थानीय संस्थाएं और आम नागरिक जागरूकता से जुड़ी गतिविधियों में भाग ले सकते हैं।

कुछ उपयोगी गतिविधियां हैं:

  • घर में पड़े पुराने मोबाइल, चार्जर और केबल की पहचान करके उन्हें अलग रखना।
  • अधिकृत ई-कचरा संग्रह केंद्रों और टेक-बैक कार्यक्रमों की जानकारी साझा करना।
  • स्कूलों और कॉलेजों में ई-कचरा प्रबंधन पर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित करना।
  • पुराने उपकरणों की मरम्मत और दोबारा इस्तेमाल को प्रोत्साहित करना।
  • कंपनियों और खुदरा विक्रेताओं से जिम्मेदार संग्रह तथा रीसाइक्लिंग की जानकारी लेना।
  • सोशल मीडिया पर #InternationalEwasteDay और #Ewaste जैसे हैशटैग के जरिए जागरूकता फैलाना।

इस वर्ष की थीम के अनुसार, छोटे इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों पर विशेष ध्यान देना उपयोगी होगा। कोई केबल या ईयरफोन आकार में छोटा हो सकता है, लेकिन उपयोग के बाद उसे सही तरीके से संभालना उतना ही जरूरी है।


निष्कर्ष

International E-Waste Day 2026 हमें याद दिलाता है कि तकनीकी प्रगति के साथ इलेक्ट्रॉनिक कचरे के जिम्मेदार प्रबंधन की जरूरत भी बढ़ती है। पुराने मोबाइल, चार्जर, केबल और छोटे गैजेट्स को सामान्य कचरे में फेंकने के बजाय सही संग्रह और रीसाइक्लिंग व्यवस्था तक पहुंचाना पर्यावरण संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

हर साल 14 अक्टूबर को मनाया जाने वाला यह दिवस लोगों, कंपनियों और सरकारों को ई-कचरे की समस्या के प्रति जागरूक करता है। वर्ष 2026 की थीम “Fast Tech: Don’t bin it, bring it in” का संदेश भी यही है कि छोटे और सस्ते इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों को नजरअंदाज न करें।

भारत में नागरिकों की जिम्मेदार आदतें, प्रभावी सरकारी नियम, उत्पादकों की भागीदारी और अधिकृत रीसाइक्लिंग व्यवस्था मिलकर ई-कचरे के बेहतर प्रबंधन में योगदान दे सकते हैं।


International E-Waste Day 2026 से जुड़े FAQs

1. International E-Waste Day 2026 कब है?

अंतर्राष्ट्रीय ई-कचरा दिवस 14 अक्टूबर 2026, बुधवार को मनाया जाएगा।

2. International E-Waste Day 2026 की थीम क्या है?

इस वर्ष की थीम “Fast Tech: Don’t bin it, bring it in” है। यह छोटे और सस्ते इलेक्ट्रॉनिक उत्पादों को सामान्य कचरे में फेंकने के बजाय उचित संग्रह और रीसाइक्लिंग के लिए जमा करने पर जोर देती है।

3. अंतर्राष्ट्रीय ई-कचरा दिवस की शुरुआत कब हुई थी?

इस दिवस की शुरुआत वर्ष 2018 में WEEE Forum द्वारा की गई थी।

4. ई-कचरा किसे कहते हैं?

पुराने, खराब या इस्तेमाल से बाहर हो चुके इलेक्ट्रिकल और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों को ई-कचरा कहा जाता है। इसमें मोबाइल फोन, कंप्यूटर, चार्जर, केबल, टीवी और कई अन्य उपकरण शामिल हो सकते हैं।

5. भारत में ई-कचरे के प्रबंधन की जिम्मेदारी किसकी है?

भारत में पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय तथा केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) ई-कचरा प्रबंधन से संबंधित नियमों और व्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उत्पादकों और पंजीकृत रीसाइक्लरों की भी नियमों के अनुसार जिम्मेदारियां होती हैं।

6. पुराने मोबाइल और चार्जर को कहां फेंकना चाहिए?

उन्हें सामान्य कचरे में डालने के बजाय अधिकृत ई-कचरा संग्रह केंद्र, निर्माता की टेक-बैक योजना या पंजीकृत रीसाइक्लर को देना चाहिए।

7. ई-कचरे को सामान्य कचरे में फेंकना क्यों गलत है?

ई-कचरे में कुछ खतरनाक पदार्थ और उपयोगी संसाधन हो सकते हैं। गलत निपटान से प्रदूषण का जोखिम बढ़ सकता है और दोबारा उपयोग की जा सकने वाली सामग्री भी बर्बाद हो सकती है।


अक्टूबर माह के महत्वपूर्ण दिवस:
● 02 अक्टूबर: लाल बहादुर शास्त्री जयंती
● 03 अक्टूबर: बॉयफ्रेंड डे
● 04 अक्टूबर: विश्व पशु दिवस
● 05 अक्टूबर: अंतर्राष्ट्रीय शिक्षक दिवस
● 06 अक्टूबर: वर्ल्ड स्माइल डे
● 07 अक्टूबर: विश्व कपास दिवस
● 08 अक्टूबर: वायु सेना दिवस, विश्व दृष्टि दिवस
● 09 अक्टूबर: विश्व डाक दिवस
● 10 अक्टूबर: मानसिक स्वास्थ्य दिवस, प्रवासी पक्षी दिवस
● 11 अक्टूबर: अंतर्राष्ट्रीय बालिका दिवस
● 16 अक्टूबर: विश्व खाद्य दिवस
● 24 अक्टूबर: विश्व पोलियो दिवस
● 31 अक्टूबर: एकता दिवस (वल्लभभाई जयंती)


Sandeep Kumar

संदीप, HindiGyanStudio.Com के प्रमुख लेखक हैं, वे अक्सर इस पर महत्वपूर्ण दिवसों, जयंती, त्योहारों और अन्य जरुरी विषयों पर जानकारी अपडेट करते हैं। उनके पास कंटेंट लेखन में 5 सालों से अधिक का अनुभव है, वे इससे पहले कई वेबसाइट्स पर आर्टिकल लिखते रहे है।

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