Bharatiya Tatrakshak Divas 2026: भारत एक विशाल समुद्री राष्ट्र है, जिसकी तटरेखा लगभग 7,500 किलोमीटर से भी अधिक लंबी है। अरब सागर, बंगाल की खाड़ी और हिंद महासागर से घिरे इस देश की समुद्री सीमाओं की सुरक्षा उतनी ही आवश्यक है जितनी ज़मीनी सीमाओं की। इन्हीं समुद्री सीमाओं की रक्षा के लिए जो बल दिन-रात सतर्क रहता है, वही है भारतीय तटरक्षक बल (Indian Coast Guard)। इस बल के साहस, सेवा और समर्पण को सम्मान देने के लिए हर वर्ष 1 फरवरी को भारतीय तटरक्षक दिवस मनाया जाता है।

साल 2026 में भारतीय तटरक्षक दिवस 1 फरवरी को अपनी 50वीं वर्षगांठ मना रहा है, जिसे पूरे देश में गर्व और सम्मान के साथ मनाया जाएगा। यह दिन न केवल एक बल की स्थापना की याद दिलाता है, बल्कि उन अनगिनत बलिदानों और जिम्मेदारियों को भी सामने लाता है, जो आम नागरिकों की नज़रों से अक्सर ओझल रह जाती हैं।
भारतीय तटरक्षक दिवस कब और क्यों मनाया जाता है?
भारतीय तटरक्षक दिवस हर साल 1 फरवरी को मनाया जाता है। इस तारीख का विशेष महत्व है क्योंकि 1 फरवरी 1977 को भारतीय तटरक्षक बल की स्थापना एक अंतरिम संगठन के रूप में की गई थी। शुरुआत में इसका उद्देश्य समुद्री तस्करी, अवैध गतिविधियों और भारत के जलक्षेत्र की सुरक्षा सुनिश्चित करना था।
बाद में 18 अगस्त 1978 को ‘तटरक्षक अधिनियम’ (Coast Guard Act, 1978) भारतीय संसद ने पारित किया गया और 19 अगस्त 1978 को अधिनियम लागू होकर भारतीय तटरक्षक बल को एक स्वतंत्र सशस्त्र बल के रूप में औपचारिक पहचान मिली। तभी से भारतीय तटरक्षक बल रक्षा मंत्रालय के अधीन कार्य करते हुए भारत की समुद्री सुरक्षा की रीढ़ बन गया।
भारतीय तटरक्षक दिवस 2026 क्यों है खास?
वर्ष 2026 में इंडियन कोस्ट गार्ड अपनी 50वीं स्थापना वर्षगांठ (50th Raising Day) मनाने जा रहा है। 1977 में जहाँ यह बल केवल 7 जहाजों के साथ शुरू हुआ था, वहीं आज यह एक अत्याधुनिक और सशक्त समुद्री बल बन चुका है। वर्तमान समय में इंडियन कोस्ट गार्ड के पास 150 से अधिक जहाज और 75 से अधिक एयरक्राफ्ट (हेलीकॉप्टर और विमान) मौजूद हैं।
सरकार के लक्ष्य के अनुसार 2030 तक यह संख्या बढ़कर लगभग 200 जहाज और 100 एयरक्राफ्ट तक पहुँच जाएगी, जिससे यह दुनिया के सबसे शक्तिशाली कोस्ट गार्ड संगठनों में शामिल हो जाएगा।
77वें गणतंत्र दिवस 2026 से पहले राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू द्वारा भारतीय तटरक्षक बल के कई कर्मियों को उनकी असाधारण सेवा, साहस और मानवता के लिए सम्मानित करने की मंजूरी दी गई। इन सम्मानों में अति विशिष्ट सेवा पदक, राष्ट्रपति तटरक्षक पदक, जीवन रक्षा पदक और वीरता पदक शामिल हैं।
यह सम्मान इस बात का प्रमाण है कि इंडियन कोस्ट गार्ड न सिर्फ समुद्र की रक्षा करता है, बल्कि मानव जीवन की रक्षा को भी सर्वोच्च प्राथमिकता देता है।
भारतीय तटरक्षक बल स्थापना दिवस का इतिहास:
1960 के दशक में भारत को समुद्र के रास्ते होने वाली तस्करी और अन्य अवैध गतिविधियों के कारण भारी आर्थिक नुकसान होने लगा था। उस समय भारतीय नौसेना और सीमा शुल्क विभाग मिलकर इन चुनौतियों से निपटने का प्रयास कर रहे थे, लेकिन जल्द ही यह स्पष्ट हो गया कि समुद्री सुरक्षा के लिए एक विशेष और समर्पित बल की आवश्यकता है।
समितियों की सिफारिशों से शुरुआत
समुद्री तस्करी और तटीय सुरक्षा के मुद्दे पर अध्ययन के लिए 1970 में नाग समिति (Nag Committee) का गठन किया गया, जिसने एक अलग तटीय/समुद्री सुरक्षा बल की आवश्यकता पर जोर दिया।
इसके बाद 1974 में के. एफ. रुस्तमजी की अध्यक्षता में रुस्तमजी समिति का गठन किया गया। इस समिति ने अपनी रिपोर्ट (1975) में स्पष्ट रूप से कोस्ट गार्ड जैसे संगठन की स्थापना की सिफारिश की, ताकि समुद्री कानून प्रवर्तन और तटीय सुरक्षा को प्रभावी बनाया जा सके।
इन सिफारिशों के आधार पर 1 फरवरी 1977 को भारतीय तटरक्षक बल की अंतरिम स्थापना की गई और 1978 में तटरक्षक अधिनियम लागू कर इसे एक स्वतंत्र सशस्त्र बल का दर्जा दिया गया।
शुरुआत में इस बल को भारतीय नौसेना से स्थानांतरित कुछ जहाज और सीमित संसाधन उपलब्ध कराए गए। समय के साथ भारतीय तटरक्षक बल की क्षमता, तकनीक और कार्यक्षेत्र में उल्लेखनीय विस्तार हुआ, और यह भारत की समुद्री सुरक्षा का एक महत्वपूर्ण स्तंभ बन गया।
समय के साथ बढ़ी भारतीय तटरक्षक बल की भूमिका?
शुरुआत में इंडियन कोस्ट गार्ड का मुख्य ध्यान समुद्री तस्करी रोकने तक सीमित था, लेकिन आज इसकी भूमिका काफी व्यापक हो चुकी है। पिछले कुछ दशकों में इस बल ने समुद्री कानून प्रवर्तन, पर्यावरण संरक्षण, खोज एवं बचाव अभियान (Search & Rescue), आपदा प्रबंधन, आतंकवाद विरोधी समुद्री निगरानी जैसे क्षेत्रों में भी अपनी मजबूत पहचान बनाई है।
1999 में एमवी अलॉन्ड्रा रेनबो नामक जहाज को समुद्री डाकुओं से मुक्त कराना इंडियन कोस्ट गार्ड का एक ऐतिहासिक अभियान माना जाता है। वहीं 2008 के मुंबई आतंकी हमलों के बाद समुद्री निगरानी को और मजबूत किया गया, जिसमें तटरक्षक बल की भूमिका निर्णायक रही।
भारतीय तटरक्षक दिवस 2026 की थीम
भारतीय तटरक्षक दिवस 2026 की आधिकारिक थीम अभी घोषित नहीं की गई है। हालांकि, पिछले वर्षों की थीम से यह साफ है कि भारतीय तटरक्षक बल लगातार नवाचार, तकनीक और साहस पर ज़ोर देता रहा है। उदाहरण के तौर पर, 2025 की थीम थी –
“भारतीय तटरक्षक बल: नवाचार, सुरक्षा और वीरतापूर्ण सेवा”।
यह थीम इस बात को दर्शाती है कि भारतीय तटरक्षक बल आधुनिक तकनीकों को अपनाकर न केवल समुद्री सुरक्षा को मजबूत कर रहा है, बल्कि राष्ट्र सेवा को अपने मूल सिद्धांत के रूप में जी रहा है। उम्मीद की जा सकती है कि 2026 की थीम भी इसी भावना को आगे बढ़ाएगी।
भारतीय तटरक्षक दिवस का उद्देश्य
भारतीय तटरक्षक दिवस मनाने के पीछे कई महत्वपूर्ण उद्देश्य हैं। यह दिन हमें यह याद दिलाता है कि समुद्र की शांति और सुरक्षा के पीछे कितनी बड़ी जिम्मेदारी और संघर्ष छिपा हुआ है।
यह दिवस:
- भारतीय तटरक्षक बल के गौरवशाली इतिहास को सम्मान देता है
- समुद्री सुरक्षा और पर्यावरण संरक्षण के महत्व को उजागर करता है
- तटरक्षक कर्मियों के साहस, समर्पण और बलिदान को नमन करता है
- आम नागरिकों को इस बल की भूमिका और जिम्मेदारियों के प्रति जागरूक करता है
- युवाओं को भारतीय तटरक्षक बल में करियर बनाने के लिए प्रेरित करता है।
इंडियन कोस्ट गार्ड डे का महत्व
आज के समय में जब समुद्री सीमाओं से जुड़े खतरे लगातार बदल रहे हैं, भारतीय तटरक्षक बल की भूमिका पहले से कहीं अधिक महत्वपूर्ण हो गई है। भारतीय तटरक्षक दिवस हमें यह समझने का अवसर देता है कि यह बल केवल हथियारों से नहीं, बल्कि सतर्कता, मानवीय सेवा और पर्यावरणीय जिम्मेदारी से भी देश की रक्षा करता है।
यह दिन उन वीर जवानों को श्रद्धांजलि देने का अवसर है जो परिवार से दूर रहकर, कठोर परिस्थितियों में भी राष्ट्र की सेवा करते हैं। साथ ही यह समाज में समुद्री सुरक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ाने का भी एक महत्वपूर्ण माध्यम है।
भारतीय तटरक्षक बल का आदर्श वाक्य क्या है?
भारतीय तटरक्षक बल का आदर्श वाक्य है –“वयम् रक्षामः” अर्थात “हम रक्षा करते हैं”। यह वाक्य केवल शब्द नहीं है, बल्कि हर तटरक्षक कर्मी के जीवन का उद्देश्य है। चाहे भयंकर तूफान हो, समुद्र में दुर्घटना या देश की सुरक्षा से जुड़ा खतरा — भारतीय तटरक्षक बल हर परिस्थिति में डटा रहता है।
भारतीय तटरक्षक दिवस 2026 केवल एक औपचारिक दिवस नहीं, बल्कि भारत की समुद्री सुरक्षा व्यवस्था की मजबूती और विश्वसनीयता का प्रतीक है। यह दिन हमें याद दिलाता है कि हमारी समुद्री सीमाएँ सुरक्षित हैं क्योंकि वहां भारतीय तटरक्षक बल हर पल चौकन्ना है।
जब भी 1 फरवरी आता है, तो यह सिर्फ एक तारीख नहीं होती, बल्कि उन अनगिनत कहानियों का सम्मान होता है, जो समुद्र की लहरों के बीच लिखी जाती हैं — साहस, सेवा और समर्पण की कहानियाँ।












