Ganesh Jayanti 2026 Date: हिंदू धर्म में भगवान गणेश को प्रथम पूज्य देवता का स्थान प्राप्त है। कोई भी शुभ कार्य हो, नया व्यापार हो, विवाह हो या फिर कोई आध्यात्मिक अनुष्ठान—गणपति बप्पा के स्मरण के बिना शुरुआत अधूरी मानी जाती है। यही कारण है कि जब भी जीवन में रुकावटें आती हैं, कार्य अटकते हैं या मन में असमंजस की स्थिति बनती है, तब सबसे पहले “ॐ गं गणपतये नमः” का जाप किया जाता है। ऐसे में गणेश जयंती केवल एक पर्व नहीं, बल्कि आस्था, विश्वास और नई शुरुआत का प्रतीक बन जाती है।

Ganesh Ji birthday: गणेश जी का जन्म दिवस कब मनाया जाता है?
हर साल माघ मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि को गणेश जयंती मनाई जाती है। इसे माघी गणेश चतुर्थी, माघ विनायक चतुर्थी और गौरी गणेश चतुर्थी भी कहा जाता है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, इसी पावन तिथि पर भगवान गणेश का जन्म हुआ था और इसी दिन से चतुर्थी तिथि का विशेष संबंध गणपति बप्पा से जुड़ गया। साल 2026 में गणेश जयंती को लेकर लोगों के मन में सबसे बड़ा सवाल यही है कि यह पर्व 22 जनवरी को मनाया जाएगा या 23 जनवरी को। आइए इस पूरे भ्रम को विस्तार से समझते हैं।
गणेश जयंती 2026 की सही तारीख कब है?
वैदिक पंचांग की गणना के अनुसार, माघ शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि (जिसे तिलकुंड या वरद चतुर्थी भी कहते है) का आरंभ 22 जनवरी 2026 को रात 02 बजकर 47 मिनट पर हो रहा है। वहीं, इस तिथि का समापन 23 जनवरी 2026 को रात 02 बजकर 28 मिनट पर होगा। शास्त्रों में किसी भी व्रत और पर्व को मनाने के लिए उदया तिथि को प्राथमिकता दी जाती है। चूंकि चतुर्थी की उदया तिथि और मध्याह्न काल 22 जनवरी 2026, गुरुवार को पड़ रहा है, इसलिए इसी दिन गणेश जयंती मनाई जाएगी।
इस तरह स्पष्ट है कि Ganesh Jayanti 2026 की तारीख 22 जनवरी 2026, गुरुवार है। इस दिन श्रद्धालु पूरे विधि-विधान से भगवान गणेश की पूजा-अर्चना करेंगे और माघ विनायक चतुर्थी (तिलकुंड चतुर्थी) का व्रत रखेंगे।
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गणेश जयंती 2026 पर शुभ योग और अशुभ भद्रा का संयोग
साल 2026 की गणेश जयंती कई मायनों में खास मानी जा रही है। एक ओर इस दिन अत्यंत शुभ रवि योग का निर्माण हो रहा है, तो दूसरी ओर भद्रा का साया भी रहेगा। रवि योग को शास्त्रों में बेहद शुभ माना गया है। ऐसा माना जाता है कि इस योग में किए गए पूजा-पाठ और धार्मिक कार्यों से सभी प्रकार के दोष समाप्त हो जाते हैं और साधक को विशेष फल की प्राप्ति होती है।
गणेश जयंती के दिन सुबह 07 बजकर 14 मिनट से रवि योग की शुरुआत हो रही है, जो दोपहर 02 बजकर 27 मिनट तक रहेगा। इसी दौरान वरीयान योग और परिघ योग का भी संयोग बन रहा है। नक्षत्र की बात करें तो सुबह के समय शतभिषा नक्षत्र रहेगा और दोपहर के बाद पूर्वाभाद्रपद नक्षत्र प्रभाव में आएगा। कुल मिलाकर यह दिन आध्यात्मिक दृष्टि से काफी प्रभावशाली माना जा रहा है।
हालांकि, इसी दिन भद्रा का वास धरती पर रहेगा। शास्त्रों के अनुसार, भद्रा काल में कोई भी शुभ कार्य करना वर्जित होता है। गणेश जयंती पर भद्रा काल दोपहर 02 बजकर 40 मिनट से शुरू होकर 23 जनवरी 2026 को तड़के 02 बजकर 28 मिनट तक रहेगा। इसलिए श्रद्धालुओं को सलाह दी जाती है कि भद्रा शुरू होने से पहले ही पूजा-पाठ और व्रत से जुड़े सभी कार्य पूरे कर लें।
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गणेश जयंती 2026 पूजा का शुभ मुहूर्त
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान गणेश का जन्म मध्याह्न काल में हुआ था। इसी कारण गणेश जयंती पर मध्याह्न काल में पूजा करना सबसे उत्तम माना जाता है। साल 2026 में गणेश जयंती पर मध्याह्न पूजा का शुभ मुहूर्त सुबह 11 बजकर 05 मिनट से दोपहर 01 बजकर 15 मिनट तक रहेगा। इस तरह पूजा के लिए लगभग 2 घंटे 10 मिनट का समय मिलेगा।
कुछ पंचांगों के अनुसार, यह मुहूर्त सुबह 11 बजकर 29 मिनट से दोपहर 01 बजकर 37 मिनट तक भी माना गया है। दोनों ही स्थितियों में यही सलाह दी जाती है कि श्रद्धालु भद्रा काल से पहले, रवि योग के दौरान मध्याह्न समय में गणपति बप्पा की पूजा करें।
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माघी गणेश जयंती क्यों मनाई जाती है?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, जिस दिन भगवान गणेश की दिव्य तरंगें पहली बार पृथ्वी पर प्रकट हुईं, वह दिन माघ शुक्ल चतुर्थी था। इसी दिन भगवान गणेश का जन्म हुआ और तभी से यह तिथि ‘श्री गणेश जयंती’ के रूप में प्रसिद्ध हो गई। माघ मास का विशेष महत्व पहले से ही धार्मिक दृष्टि से माना जाता है और जब इसी महीने में विघ्नहर्ता का जन्मोत्सव आता है, तो इसका आध्यात्मिक प्रभाव और भी बढ़ जाता है।
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Ganesh Jayanti की पूजा विधि (सरल और प्रभावी तरीका)
गणेश जयंती के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान आदि कर लाल या पीले रंग के स्वच्छ वस्त्र धारण करें। इसके बाद पूजा के लिए घर के मंदिर या पूजा स्थल को साफ कर एक चौकी पर लाल कपड़ा बिछाएं और भगवान गणेश की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें। यदि प्रतिमा धातु की हो, तो गंगाजल या पंचामृत से उनका अभिषेक करें।
इसके बाद गणेश जी को सिंदूर का तिलक लगाएं, क्योंकि उन्हें सिंदूर अत्यंत प्रिय है। दूर्वा की 21 गांठें और लाल फूल अर्पित करें। भोग में मोदक, मोतीचूर के लड्डू या घर में बनी मिठाई चढ़ाएं। पूजा के दौरान “ॐ गं गणपतये नमः” मंत्र का जाप करें और अंत में गणेश चालीसा या चतुर्थी कथा का पाठ करें। पूजा के समापन पर घी के दीपक से आरती करना शुभ माना जाता है।
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गणेश जयंती का महत्व और आध्यात्मिक लाभ
गणेश जयंती, जिसे माघ विनायक चतुर्थी कहा जाता है, आध्यात्मिक रूप से अत्यंत शक्तिशाली दिन माना जाता है। मान्यता है कि इस दिन सच्चे मन से किया गया व्रत और पूजा जीवन की बड़ी से बड़ी बाधाओं को भी दूर कर सकती है। भगवान गणेश बुद्धि, विवेक और ज्ञान के देवता हैं। इसलिए छात्रों, प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वालों और करियर में सफलता चाहने वालों के लिए यह दिन विशेष फलदायी माना जाता है।
इस दिन व्रत रखने से घर में चल रहे कलह-क्लेश शांत होते हैं और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। साथ ही, इसे ‘तिलकुंद चतुर्थी’ भी कहा जाता है, क्योंकि इस दिन तिल का दान और तिल से बनी वस्तुओं का सेवन शुभ माना जाता है। ज्योतिषीय दृष्टि से भी यह दिन महत्वपूर्ण है, क्योंकि गणेश जी की पूजा करने से कुंडली में मौजूद बुध दोष शांत होता है और व्यक्ति को ज्ञान व विद्या की प्राप्ति होती है।
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गणेश जयंती पर चंद्र दर्शन क्यों वर्जित है?
शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि पर चंद्रमा के दर्शन को अशुभ माना गया है। पौराणिक कथा के अनुसार, इस दिन चंद्रमा देखने से व्यक्ति पर झूठे आरोप लग सकते हैं और मानहानि का सामना करना पड़ सकता है। साल 2026 में गणेश जयंती के दिन सुबह 09 बजकर 22 मिनट से रात 09 बजकर 19 मिनट तक चंद्र दर्शन वर्जित रहेगा। इसलिए श्रद्धालुओं को इस समयावधि में चंद्रमा देखने से बचना चाहिए।
डिस्क्लेमर: इस लेख में दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं, पंचांग और सामान्य ज्योतिषीय तथ्यों पर आधारित है। इसका उद्देश्य केवल पाठकों को जानकारी देना है। कृपया किसी भी धार्मिक निर्णय से पहले अपने विवेक और स्थानीय पंचांग/विद्वान की सलाह अवश्य लें।








