World Interfaith Harmony Week 2026: विश्व अंतरधार्मिक सद्भाव सप्ताह कब होता है? जानिए इतिहास, महत्व और थीम

क्या धर्म इंसानों को जोड़ने के लिए बना है या तोड़ने के लिए? 🤔 जब दुनिया में धार्मिक मतभेद बढ़ते जा रहे हैं, तब World Interfaith Harmony Week 2026 हमें एक बेहद जरूरी सवाल पूछने पर मजबूर करता है — क्या हम इंसानियत को अब भी सबसे ऊपर रख सकते हैं?



वर्ल्ड इंटरफेथ हार्मनी वीक 2026: आज की दुनिया तेजी से बदल रही है। तकनीक ने हमें जोड़ तो दिया है, लेकिन दिलों के बीच की दूरियां कहीं-कहीं बढ़ती भी दिखाई देती हैं। अलग-अलग धर्म, आस्थाएं और मान्यताएं मानव समाज की खूबसूरती हैं, लेकिन जब यही विविधता टकराव का कारण बन जाए, तो शांति खतरे में पड़ जाती है। ऐसे ही समय में विश्व अंतरधार्मिक सद्भाव सप्ताह (World Interfaith Harmony Week) का महत्व और भी बढ़ जाता है। यह सप्ताह हमें याद दिलाता है कि धर्म चाहे कोई भी हो, इंसानियत सबसे ऊपर है।

विश्व अंतरधार्मिक सद्भाव सप्ताह (World Interfaith Harmony Week)
विश्व अंतरधार्मिक सद्भाव सप्ताह (World Interfaith Harmony Week)

विश्व अंतरधार्मिक सद्भाव सप्ताह कब मनाया जाता है?

विश्व अंतरधार्मिक सद्भाव सप्ताह हर साल फरवरी महीने के पहले सप्ताह यानी 1 से 7 फरवरी के बीच मनाया जाता है। वर्ष 2026 में भी यह सप्ताह 1 फरवरी से 7 फरवरी 2026 तक मनाया जाएगा। यह एक अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त आयोजन है, जिसे संयुक्त राष्ट्र (United Nations) का समर्थन प्राप्त है। इस पूरे सप्ताह का उद्देश्य दुनिया भर में अलग-अलग धर्मों के लोगों के बीच संवाद, आपसी समझ और भाईचारे की भावना को मजबूत करना है।


विश्व अंतरधार्मिक सद्भाव सप्ताह का इतिहास

विश्व अंतरधार्मिक सद्भाव सप्ताह की शुरुआत वर्ष 2010 में हुई थी। इसकी कल्पना जॉर्डन के राजा अब्दुल्ला द्वितीय ने की थी। उन्होंने अक्टूबर 2010 में संयुक्त राष्ट्र महासभा के सामने यह प्रस्ताव रखा कि दुनिया में शांति की संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए धर्मों के बीच संवाद और सद्भाव को एक वैश्विक मंच मिलना चाहिए।

इस प्रस्ताव को संयुक्त राष्ट्र महासभा ने 20 अक्टूबर 2010 को सर्वसम्मति से स्वीकार कर लिया और एक प्रस्ताव (A/RES/65/5) पारित किया गया। इसके तहत फरवरी के पहले सप्ताह को आधिकारिक रूप से World Interfaith Harmony Week घोषित किया गया। संयुक्त राष्ट्र महासभा ने यह भी स्पष्ट किया कि आपसी समझ और अंतरधार्मिक संवाद शांति की संस्कृति के महत्वपूर्ण स्तंभ हैं।


इस सप्ताह को मनाने की आवश्यकता क्यों पड़ी?

दुनिया के कई हिस्सों में धार्मिक मतभेदों के कारण हिंसा, संघर्ष और अविश्वास देखने को मिलता रहा है। इतिहास गवाह है कि जब धर्म का गलत अर्थों में इस्तेमाल हुआ, तो समाज को भारी कीमत चुकानी पड़ी। ऐसे माहौल में संयुक्त राष्ट्र ने यह महसूस किया कि केवल राजनीतिक या आर्थिक समाधान ही काफी नहीं हैं, बल्कि दिलों और विचारों को जोड़ने वाला संवाद भी जरूरी है।

विश्व अंतरधार्मिक सद्भाव सप्ताह इसी सोच का परिणाम है। इसका मकसद किसी एक धर्म को बढ़ावा देना नहीं, बल्कि सभी धर्मों के बीच सम्मान और समझ का पुल बनाना है।


विश्व अंतरधार्मिक सद्भाव सप्ताह का उद्देश्य

इस सप्ताह का मूल उद्देश्य बेहद सरल लेकिन गहरा है। यह लोगों को यह समझाने का प्रयास करता है कि हर धर्म के मूल में प्रेम, करुणा, सहिष्णुता और शांति का संदेश छिपा है। जब हम इन साझा मूल्यों को पहचानते हैं, तो मतभेद अपने आप छोटे लगने लगते हैं।

यह सप्ताह लोगों को प्रोत्साहित करता है कि वे एक-दूसरे की धार्मिक मान्यताओं को जानें, समझें और उनका सम्मान करें। साथ ही, यह पहल धार्मिक संघर्षों को कम करने और वैश्विक स्तर पर शांति की संस्कृति स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।


World Interfaith Harmony Week 2026 की थीम

हर साल विश्व अंतरधार्मिक सद्भाव सप्ताह की एक विशेष थीम होती है, जो उस समय की वैश्विक परिस्थितियों और चुनौतियों को ध्यान में रखकर तय की जाती है।

World Interfaith Harmony Week 2026 की थीम अभी घोषित नहीं की गई है (To be announced)।
हालांकि, पिछले वर्षों की थीम्स पर नजर डालें तो यह साफ दिखाई देता है कि फोकस हमेशा शांति, एकता और सहयोग पर रहा है। जैसे 2024 की थीम “Uniting for Peace” और 2023 की थीम “Harmony in a World in Crisis” थी। इससे उम्मीद की जा सकती है कि 2026 की थीम भी वैश्विक एकजुटता और आपसी सद्भाव को मजबूत करने वाली होगी।


विश्व अंतरधार्मिक सद्भाव सप्ताह कैसे मनाया जाता है?

यह सप्ताह किसी एक तय ढांचे में नहीं बंधा होता। संयुक्त राष्ट्र ने सभी देशों, संस्थानों और नागरिक समाज से अपील की है कि वे अपनी परंपराओं और विश्वासों के अनुसार इसे मनाएं। दुनिया भर में इस दौरान मंदिरों, मस्जिदों, गिरजाघरों, गुरुद्वारों, सिनागॉग और अन्य पूजा स्थलों में विशेष कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं।

कई जगहों पर अंतरधार्मिक संवाद सत्र होते हैं, जहां अलग-अलग धर्मों के प्रतिनिधि एक साथ बैठकर शांति, मानवता और सामाजिक सद्भाव पर चर्चा करते हैं। कहीं सामूहिक प्रार्थनाएं होती हैं, तो कहीं सांस्कृतिक कार्यक्रमों के माध्यम से एकता का संदेश दिया जाता है।

एक सरल लेकिन प्रभावी तरीका यह भी है कि अलग-अलग धर्मों के लोगों को एक साथ नाश्ते या ब्रंच पर आमंत्रित किया जाए। जब लोग एक ही मेज पर बैठकर खुलकर बातचीत करते हैं, तो पूर्वाग्रह अपने आप टूटने लगते हैं।


अंतरधार्मिक सद्भाव क्यों है आज के समय की जरूरत?

आज का समाज सोशल मीडिया और त्वरित सूचनाओं का समाज है, जहां अधूरी या गलत जानकारी बहुत जल्दी फैल जाती है। कई बार यही गलतफहमियां धर्म के नाम पर नफरत को जन्म देती हैं। ऐसे में अंतरधार्मिक सद्भाव हमें सिखाता है कि किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले संवाद जरूरी है।

जब अलग-अलग धर्मों के लोग एक-दूसरे की मान्यताओं को समझते हैं, तो डर की जगह भरोसा ले लेता है। यह भरोसा ही एक शांतिपूर्ण और समावेशी समाज की नींव बनता है।


अंतरधार्मिक सद्भाव को बढ़ावा कैसे दिया जा सकता है?

अंतरधार्मिक सद्भाव कोई एक हफ्ते का काम नहीं है, बल्कि यह एक निरंतर प्रक्रिया है। इसके लिए जरूरी है कि समाज में संवाद के मंच तैयार किए जाएं, जहां लोग बिना डर और पूर्वाग्रह के बात कर सकें। शिक्षा के माध्यम से बच्चों को शुरू से ही विविधता का सम्मान करना सिखाया जाए।

इसके साथ-साथ हमें मतभेदों पर ज्यादा ध्यान देने के बजाय समानताओं का जश्न मनाना चाहिए। लगभग हर धर्म करुणा, प्रेम, सेवा और न्याय की बात करता है। जब हम इन साझा मूल्यों को अपनाते हैं, तो सद्भाव अपने आप मजबूत होता है।


World Interfaith Harmony Week 2026 केवल एक अंतरराष्ट्रीय आयोजन नहीं, बल्कि एक सोच है, एक संदेश है कि दुनिया को जोड़ने वाली ताकतें आज भी मौजूद हैं। यह सप्ताह हमें याद दिलाता है कि धर्म का असली उद्देश्य लोगों को बांटना नहीं, बल्कि जोड़ना है।

अगर हम सच में एक शांत और बेहतर दुनिया चाहते हैं, तो हमें इस सप्ताह के संदेश को केवल सात दिनों तक सीमित नहीं रखना चाहिए। इसे अपने रोजमर्रा के व्यवहार, बातचीत और सोच का हिस्सा बनाना ही विश्व अंतरधार्मिक सद्भाव सप्ताह की सच्ची सफलता होगी।


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