Holi Bhai Dooj 2026: भारतीय संस्कृति में भाई-बहन का रिश्ता सिर्फ खून का नहीं, बल्कि विश्वास, सुरक्षा और स्नेह का प्रतीक माना जाता है। इसी पवित्र रिश्ते को समर्पित एक विशेष पर्व है होली भाई दूज, जिसे भ्रातृ द्वितीया भी कहा जाता है। यह त्योहार साल में दो बार आता है—एक बार दीपावली के बाद और दूसरी बार होली के तुरंत बाद। साल 2026 में होली क बाद आने वाले भैया दूज का महत्व और भी बढ़ गया है, क्योंकि इस बार होली से ठीक पहले चंद्र ग्रहण का विशेष योग बन रहा है, जिससे यह पर्व आध्यात्मिक दृष्टि से और खास हो जाता है।

इस लेख में हम विस्तार से जानेंगे कि Holi Bhai Dooj 2026 कब है, इसका शुभ मुहूर्त क्या है, तिलक करने की सही विधि क्या है और इससे जुड़ी पौराणिक कथाएं क्या संदेश देती हैं।
होली भाई दूज 2026 की सही तारीख और तिथि
पंचांग के अनुसार, चैत्र मास के कृष्ण पक्ष की द्वितीया तिथि 4 मार्च 2026 को शाम 4 बजकर 48 मिनट से प्रारंभ होगी और 5 मार्च 2026 को शाम 5 बजकर 03 मिनट तक रहेगी। चूंकि हिंदू धर्म में उदया तिथि को मान्यता दी जाती है, इसलिए होली भाई दूज 5 मार्च 2026, गुरुवार को मनाई जाएगी।
यह दिन उन बहनों के लिए बेहद खास होता है जो अपने भाई की लंबी उम्र, सुख-समृद्धि और सफलता की कामना करती हैं। भाई भी इस दिन अपनी बहन की रक्षा और सम्मान का संकल्प लेते हैं।
होली भाई दूज 2026 का शुभ मुहूर्त (Shubh Muhurat)
किसी भी पूजा या तिलक की सफलता उसके सही समय पर निर्भर करती है। वर्ष 2026 में होली भाई दूज पर भाई को तिलक करने का श्रेष्ठ मुहूर्त दोपहर 1 बजकर 17 मिनट से 3 बजकर 31 मिनट तक रहेगा। इस दौरान तिलक करना अत्यंत शुभ माना गया है।
हालांकि, यदि किसी कारणवश इस समय में तिलक संभव न हो, तो दिन के अन्य शुभ समय में भी श्रद्धा और विश्वास के साथ तिलक किया जा सकता है। धार्मिक मान्यता है कि सच्ची भावना सबसे महत्वपूर्ण होती है।
होली भैया दूज का धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व
होली भाई दूज सिर्फ एक परंपरा नहीं, बल्कि भाई-बहन के अटूट रिश्ते का उत्सव है। इस दिन बहन अपने भाई के मस्तक पर तिलक लगाकर उसके जीवन में सुख, शांति और दीर्घायु की प्रार्थना करती है।
2026 में चंद्र ग्रहण के योग के कारण इस पर्व का महत्व और बढ़ जाता है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, ग्रहण के समय वातावरण में नकारात्मक ऊर्जा बढ़ सकती है, ऐसे में उसके बाद आने वाले शुभ पर्व सकारात्मक ऊर्जा को संतुलित करने का कार्य करते हैं। होली भाई दूज इसी सकारात्मकता का प्रतीक है।
Holi Bhai Dooj 2026: भाई को तिलक करने की विधि – सही और पारंपरिक तरीका
होली भाई दूज के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करना चाहिए और साफ या नए वस्त्र पहनने चाहिए। इसके बाद घर के पूजा स्थान या ईशान कोण में एक छोटा सा चौक आटा या चावल के घोल से बनाया जाता है। यह स्थान पवित्रता और शुभता का प्रतीक होता है।
एक थाली में कुमकुम, चंदन, अक्षत (चावल), गंगाजल और मिठाई रखी जाती है। कई स्थानों पर हल्दी, चूना और जल मिलाकर भी तिलक तैयार किया जाता है। सबसे पहले भगवान विष्णु को तिलक अर्पित किया जाता है और फिर “ॐ नमो नारायणाय” मंत्र का 27 बार जाप किया जाता है। इससे पूजा का आध्यात्मिक प्रभाव बढ़ता है।
इसके बाद भाई को लकड़ी के पाटे या ऊंचे आसन पर उत्तर या उत्तर-पूर्व दिशा की ओर मुख करके बैठाया जाता है। बहन भाई के सिर पर एक साफ कपड़ा रखती है और उसके माथे पर कुमकुम और अक्षत का तिलक लगाती है। फिर आरती उतारकर कलावा बांधा जाता है और मिठाई खिलाई जाती है।
अंत में भाई अपनी बहन के चरण स्पर्श कर आशीर्वाद लेता है और उसे उपहार या दक्षिणा देता है। यह परंपरा आपसी सम्मान और प्रेम को दर्शाती है।
होली भाई दूज की पौराणिक कथा (Story)
होली भाई दूज से जुड़ी दो प्रमुख कथाएं प्रचलित हैं, जो इस पर्व के महत्व को और गहरा बनाती हैं।
पहली कथा भगवान श्रीकृष्ण और उनकी बहन सुभद्रा से जुड़ी है। मान्यता है कि नरकासुर का वध करने के बाद श्रीकृष्ण अपनी बहन सुभद्रा के घर पहुंचे थे। सुभद्रा ने दीप जलाकर, फूलों और मिठाइयों से उनका स्वागत किया और उनके माथे पर तिलक लगाकर उनकी लंबी आयु की कामना की। उसी दिन से भाई दूज मनाने की परंपरा शुरू हुई।
दूसरी कथा यमराज और उनकी बहन यमुना से संबंधित है। कहा जाता है कि यमराज इस दिन अपनी बहन यमुना के घर गए थे। यमुना ने उनका प्रेमपूर्वक स्वागत किया, स्वादिष्ट भोजन कराया और तिलक लगाया। बहन के प्रेम से प्रसन्न होकर यमराज ने वरदान दिया कि जो भाई इस दिन अपनी बहन के घर जाकर तिलक करवाएगा, उसे अकाल मृत्यु का भय नहीं रहेगा। तभी से भाई दूज का पर्व भाई की दीर्घायु से जोड़ा गया है।
सामाजिक और पारिवारिक महत्व
आज के आधुनिक समय में, जब लोग अपने कामकाज में व्यस्त रहते हैं, ऐसे त्योहार रिश्तों को मजबूत करने का अवसर देते हैं। होली भाई दूज भाई-बहन को एक साथ समय बिताने, बचपन की यादें ताजा करने और रिश्तों में मिठास घोलने का मौका देता है।
यह पर्व हमें सिखाता है कि परिवार की एकता और प्रेम सबसे बड़ी शक्ति है। बहन का तिलक केवल एक रस्म नहीं, बल्कि उसके दिल से निकली दुआ होती है।
Holi Bhai Dooj 2026 इस वर्ष 5 मार्च को मनाई जाएगी। दोपहर 1:17 बजे से 3:31 बजे तक तिलक का शुभ मुहूर्त रहेगा। यह पर्व भाई-बहन के अटूट प्रेम, विश्वास और सुरक्षा का प्रतीक है। पौराणिक कथाएं हमें सिखाती हैं कि सच्चा प्रेम और सम्मान ही रिश्तों को अमर बनाता है।
Disclaimer: इस लेख में दी गई तिथि और मुहूर्त की जानकारी पंचांग और धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है। अलग-अलग क्षेत्रों में परंपराएं भिन्न हो सकती हैं, इसलिए अपने स्थानीय पुरोहित या ज्योतिषाचार्य से परामर्श लेना उचित रहता है।














