NDRF Raising Day 2026: NDRF स्थापना दिवस पर जानिए इसका महत्व, इतिहास और राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल के बारे में

जब चारों तरफ तबाही होती है, उम्मीदें टूटने लगती हैं और जिंदगी खतरे में होती है, तब एक नाम सबसे पहले लिया जाता है – NDRF। आखिर कौन हैं ये जांबाज़ जो हर आपदा में मौत से लड़कर लोगों को नया जीवन देते हैं? NDRF Raising Day 2026 के मौके पर जानिए इस अद्भुत बल…



राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (NDRF) स्थापना दिवस - 19 जनवरी
राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (NDRF) स्थापना दिवस – 19 जनवरी

NDRF Sthapna Divas 2026: भारत जैसे विशाल और भौगोलिक रूप से विविध देश में आपदाएँ किसी चेतावनी के बिना आ जाती हैं। कहीं बाढ़, कहीं भूकंप, कहीं चक्रवात तो कहीं भूस्खलन। ऐसी परिस्थितियों में जब आम जनजीवन ठहर जाता है, तब जिस बल पर सबसे पहले भरोसा किया जाता है, वह है राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (NDRF)। यही कारण है कि हर साल 19 जनवरी (यानि राष्ट्रीय आपदा मोचन बल स्थापना का दिन) केवल एक तारीख नहीं रहता, बल्कि यह साहस, सेवा और समर्पण का प्रतीक बन जाता है।

वर्ष 2026 में 19 जनवरी को NDRF अपना 21वां स्थापना दिवस (NDRF Raising Day 2026) मना रहा है। यह दिन उन हजारों जांबाज़ जवानों को सम्मान देने का अवसर है, जो अपनी जान की परवाह किए बिना दूसरों की जान बचाने के लिए हर आपदा में सबसे आगे खड़े नजर आते हैं।


NDRF स्थापना दिवस कब और क्यों मनाया जाता है?

राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल का स्थापना दिवस हर वर्ष 19 जनवरी को मनाया जाता है। इसकी वजह यह है कि 19 जनवरी 2006 को भारत सरकार ने आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 की धारा 44 के तहत NDRF का औपचारिक गठन किया था। इसी ऐतिहासिक दिन को याद करते हुए पूरे देश में NDRF Raising Day मनाया जाता है।

वर्ष 2026 में NDRF की स्थापना को 21 वर्ष पूरे हो रहे हैं। इन 21 वर्षों में इस बल ने न केवल देश के भीतर बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी अपनी कार्यकुशलता और मानवता की मिसाल पेश की है।


NDRF की आवश्यकता क्यों पड़ी? जानिए इसका इतिहास

1990 के दशक के अंत और 2000 के शुरुआती वर्षों में भारत ने लगातार कई विनाशकारी आपदाओं का सामना किया। 2001 का गुजरात भूकंप, 2004 की हिंद महासागर सुनामी, 2005 की मुंबई बाढ़ जैसी घटनाओं ने यह स्पष्ट कर दिया कि देश को एक ऐसे विशेषीकृत और प्रशिक्षित आपदा प्रतिक्रिया बल की आवश्यकता है, जो केवल राहत और बचाव कार्यों पर केंद्रित हो।

हालाँकि भारतीय सशस्त्र बल और अन्य एजेंसियाँ बचाव कार्यों में मदद करती थीं, लेकिन एक स्थायी, पेशेवर और आपदा-विशेष प्रशिक्षण प्राप्त बल की कमी महसूस की जा रही थी। इसी जरूरत को ध्यान में रखते हुए भारत सरकार ने आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 पारित किया। इस अधिनियम के तहत राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA) की स्थापना हुई और उसके अधीन राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (NDRF) को देश की प्रमुख आपदा प्रतिक्रिया इकाई के रूप में गठित किया गया।


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राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (NDRF) स्थापना दिवस का महत्व

NDRF Raising Day केवल एक औपचारिक आयोजन नहीं है, बल्कि यह दिन हमें यह याद दिलाता है कि विपरीत परिस्थितियों में कौन हमारे लिए ढाल बनकर खड़ा रहता है। यह दिन उन वीर जवानों के अदम्य साहस, त्याग और मानवता के प्रति उनके समर्पण को नमन करने का अवसर है।

हर भारतीय को इस बल पर गर्व है, जो हर आपदा में संकटमोचक बनकर सामने आता है। 19 जनवरी को मनाया जाने वाला NDRF स्थापना दिवस हमें यह संदेश देता है कि सेवा, साहस और संवेदनशीलता ही किसी भी सशक्त राष्ट्र की असली पहचान होती है।


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NDRF क्या है और यह किसके अधीन काम करता है?

राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल भारत सरकार का एक विशेष, बहु-कुशल और समर्पित बल है, जो प्राकृतिक और मानव निर्मित दोनों प्रकार की आपदाओं से निपटने के लिए प्रशिक्षित होता है। NDRF गृह मंत्रालय (Ministry of Home Affairs – MHA) के अधीन कार्य करता है और इसका नेतृत्व एक महानिदेशक (DG) द्वारा किया जाता है। वर्तमान में NDRF का मुख्यालय नई दिल्ली में स्थित है।

इस बल का आदर्श वाक्य है – “आपदा सेवा सदा सर्वत्र”, जिसका अर्थ है कि हर परिस्थिति, हर स्थान और हर समय सेवा के लिए तत्पर रहना। यह वाक्य NDRF के जवानों के समर्पण, साहस और निस्वार्थ सेवा भाव को पूरी तरह दर्शाता है।


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संगठनात्मक संरचना और विस्तार की कहानी

जब NDRF की स्थापना 2006 में हुई थी, तब इसमें केवल 8 बटालियन थीं। समय के साथ आपदाओं की संख्या और जटिलता बढ़ती गई, जिसके चलते इस बल का लगातार विस्तार किया गया। आज NDRF में 16 पूर्ण रूप से सुसज्जित बटालियन कार्यरत हैं।

इन बटालियनों में भारत के विभिन्न केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों जैसे BSF, CRPF, CISF, ITBP, SSB और असम राइफल्स से लिए गए प्रशिक्षित जवान शामिल हैं। प्रत्येक बटालियन में करीब 1,149 कर्मी होते हैं और हर बटालियन में कई विशेष खोज और बचाव टीमें होती हैं, जिनमें इंजीनियर, तकनीशियन, मेडिकल स्टाफ, डॉग स्क्वॉड और अन्य विशेषज्ञ शामिल रहते हैं।

देशभर में इन्हें इस तरह तैनात किया गया है कि किसी भी आपदा की सूचना मिलते ही ये कम से कम समय में घटनास्थल पर पहुँच सकें।


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NDRF किन-किन आपदाओं से निपटने में सक्षम है?

NDRF की सबसे बड़ी ताकत इसकी बहु-कुशलता है। यह बल बाढ़, चक्रवात, भूकंप, सुनामी और भूस्खलन जैसी प्राकृतिक आपदाओं के साथ-साथ औद्योगिक दुर्घटनाओं, रासायनिक रिसाव, आग, इमारत ढहने और आतंकवादी हमलों जैसी मानव निर्मित आपदाओं से निपटने में भी पूरी तरह सक्षम है।

इसके अलावा NDRF को CBRN (रासायनिक, जैविक, रेडियोलॉजिकल और परमाणु) आपात स्थितियों के लिए भी विशेष प्रशिक्षण और उपकरण उपलब्ध कराए गए हैं, जो इसे और अधिक प्रभावी बनाते हैं।


NDRF की ऐतिहासिक उपलब्धियाँ और योगदान

पिछले दो दशकों में NDRF ने आपदा प्रबंधन के क्षेत्र में जो योगदान दिया है, वह अतुलनीय है। अब तक यह बल लाखों लोगों की जान बचा चुका है और कठिन परिस्थितियों में फंसे लोगों को सुरक्षित बाहर निकाल चुका है।

NDRF ने केवल भारत में ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी अपनी उपस्थिति दर्ज कराई है। 2011 के जापान ट्रिपल डिजास्टर, 2015 के नेपाल भूकंप और 2023 के तुर्की भूकंप जैसे वैश्विक संकटों में NDRF की भूमिका को दुनियाभर में सराहा गया।

हाल के वर्षों की बात करें तो 2024 में NDRF ने हजार से अधिक बचाव अभियानों को अंजाम दिया और हजारों लोगों को नया जीवन दिया। कोविड-19 महामारी के दौरान भी इस बल ने विषम परिस्थितियों में लगातार सेवाएँ दीं।


समाज और समुदाय के लिए NDRF का योगदान

NDRF केवल आपदा के समय ही सक्रिय नहीं रहता, बल्कि यह आम नागरिकों को आपदा से पहले तैयार करने पर भी जोर देता है। समुदाय आधारित आपदा जागरूकता कार्यक्रमों, मॉक ड्रिल्स और प्रशिक्षण अभियानों के जरिए यह बल लोगों को आत्मनिर्भर बनने की प्रेरणा देता है, ताकि संकट की घड़ी में जान-माल का नुकसान कम से कम हो।


जनवरी माह के सभी जरूरी दिवस:
● 03 जनवरी: सावित्रीबाई फुले की जयंती
● 12 जनवरी: राष्ट्रीय युवा दिवस (स्वामी विवेकानंद जयंती)
● 15 जनवरी: थल सेना दिवस
● 23 जनवरी: नेताजी सुभाष चन्द्र बोस जयंती
● 25 जनवरी: राष्ट्रीय मतदाता दिवस
● 26 जनवरी: गणतंत्र दिवस
● 30 जनवरी: शहीद दिवस (महात्मा गांधी पुण्यतिथि)


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