Sheetala Saptami 2026 Puja Aarti in Hindi: शीतला सप्तमी हिन्दू धर्म में एक महत्वपूर्ण पर्व है, जो बच्चों और पूरे परिवार के स्वास्थ्य की रक्षा के लिए मनाया जाता है। यह त्योहार होली के कुछ दिन बाद आता है और इसे विशेष रूप से माताएं अपने बच्चों के अच्छे स्वास्थ्य और रोगों से सुरक्षा के लिए करती हैं। इस दिन माता शीतला की पूजा करने से चेचक, खसरा, बुखार और अन्य शीतजनित रोगों से मुक्ति मिलती है।

Sheetala Saptami 2026 Puja इस साल विशेष रूप से 10 मार्च, मंगलवार को मनाई जाएगी। वहीं, अगले दिन 11 मार्च, बुधवार को शीतला अष्टमी का पर्व होगा। इस दिन माता शीतला की पूजा विधि, मंत्र, भोग और आरती का विशेष महत्व है। आइए विस्तार से जानते हैं कि इस बार शीतला सप्तमी की पूजा कैसे करें।
शीतला सप्तमी पूजा सामग्री (Sheetala Saptami Puja Samagri)
शीतला सप्तमी की पूजा के लिए कुछ खास सामग्री की आवश्यकता होती है। पूजा सामग्री तैयार करना इस दिन के धार्मिक महत्व को और बढ़ा देता है। प्रमुख सामग्री इस प्रकार है:
- रोली और मौली
- आम के पत्ते
- जल का कलश
- चावल और हल्दी
- फूल और वस्त्र
- एक दीपक
- होली वाली बड़कुले की माला
- सिक्के
- नीम
- भोग की चीजें जैसे दही, मीठे चावल, मालपुआ
पूजा सामग्री में विशेष ध्यान यह रखें कि यह शीतल और सात्विक हो, क्योंकि माता शीतला की पूजा में ताजगी और ठंडक का महत्व है।
शीतला सप्तमी पूजा विधि (Sheetala Saptami Puja Vidhi)
शीतला सप्तमी का व्रत रखने और पूजा करने की विधि सरल लेकिन धार्मिक दृष्टि से बहुत महत्वपूर्ण है।
- सुबह जल्दी उठकर शीतल यानी ठंडे जल से स्नान करें।
- स्नान के बाद व्रत का संकल्प लें और विधि-विधान से माता शीतला की पूजा प्रारंभ करें।
- पूजा में माता को एक दिन पहले तैयार किया हुआ भोजन यानी भोग लगाना चाहिए।
- पूजा के समय शीतला सप्तमी की कथा अवश्य सुनें, जिससे व्रत का महत्व समझ में आए।
- माता की आरती करें और पूरे मन से भक्ति का अनुभव करें।
- रात्रि में माता का जागरण करें और ध्यान लगाएँ।
- पूजा में दीपक जलाना वर्जित है। यदि घर पर माता की प्रतिमा न हो तो एक मटके पर स्वास्तिक चिन्ह बनाकर पूजा करें।
इस विधि का पालन करने से परिवार में स्वास्थ्य, शांति और समृद्धि बनी रहती है।
शीतला माता पूजा मंत्र (Sheetala Mata Puja Mantra)
शीतला सप्तमी पर माता शीतला के मंत्र का जाप अत्यंत फलदायक माना गया है। मंत्र इस प्रकार हैं:
मुख्य मंत्र:
ॐ ह्रीं श्रीं शीतलायै नमः
अन्य जाप के मंत्र:
- ॐ शीतलां शान्ति रूपिणीं तुष्टां सर्व सुख प्रदाम्।
शरण्यां सर्व पापघ्नीं नित्या पूज्यां दयामयीं।
- ॐ शीतलायै नमः
- ॐ श्रीं शीतलायै नमः
इन मंत्रों का जाप करने से चेचक, खसरा और अन्य बीमारियों से परिवार की सुरक्षा होती है।
देवी शीतला की आरती (Devi Sheetala Ki Arti)
जय शीतला माता, मैया जय शीतला माता ।
आदि ज्योति महारानी, सब फल की दाता ॥
ॐ जय शीतला माता..॥
रतन सिंहासन शोभित, श्वेत छत्र भाता ।
ऋद्धि-सिद्धि चँवर ढुलावें,
जगमग छवि छाता ॥
ॐ जय शीतला माता, मैया जय शीतला माता ।
विष्णु सेवत ठाढ़े, सेवें शिव धाता ।
वेद पुराण वरणत, पार नहीं पाता ॥
ॐ जय शीतला माता, मैया जय शीतला माता ।
इन्द्र मृदङ्ग बजावत, चन्द्र वीणा हाथा ।
सूरज ताल बजावै, नारद मुनि गाता ॥
ॐ जय शीतला माता,
मैया जय शीतला माता ।
घण्टा शङ्ख शहनाई, बाजै मन भाता ।
करै भक्तजन आरती, लखि लखि हर्षाता ॥
ॐ जय शीतला माता,
मैया जय शीतला माता ।
ब्रह्म रूप वरदानी, तुही तीन काल ज्ञाता ।
भक्तन को सुख देती, मातु पिता भ्राता ॥
ॐ जय शीतला माता,
मैया जय शीतला माता ।
जो जन ध्यान लगावे, प्रेम शक्ति पाता ।
सकल मनोरथ पावे, भवनिधि तर जाता ॥
ॐ जय शीतला माता,
मैया जय शीतला माता ।
रोगों से जो पीड़ित कोई, शरण तेरी आता ।
कोढ़ी पावे निर्मल काया, अन्ध नेत्र पाता ॥
ॐ जय शीतला माता,
मैया जय शीतला माता ।
बांझ पुत्र को पावे, दारिद्र कट जाता ।
ताको भजै जो नाहीं, सिर धुनि पछताता ॥
ॐ जय शीतला माता,
मैया जय शीतला माता ।
शीतल करती जननी, तू ही है जग त्राता ।
उत्पत्ति व्याधि बिनाशन, तू सब की घाता ॥
ॐ जय शीतला माता, मैया जय शीतला माता ।
दास विचित्र कर जोड़े, सुन मेरी माता ।
भक्ति आपनी दीजै, और न कुछ भाता ॥
जय शीतला माता,
मैया जय शीतला माता ।
आदि ज्योति महारानी, सब फल की दाता ॥
ॐ जय शीतला माता..॥
आरती करने से माता शीतला की कृपा प्राप्त होती है और घर में सुख-शांति बनी रहती है।
शीतला सप्तमी भोग (Sheetala Saptami Bhog)
भोग का विशेष महत्व है क्योंकि माता को भोग एक दिन पहले तैयार करके अर्पित किया जाता है। भोग में मुख्यतः शामिल हैं:
- मीठे चावल
- पूड़ी
- बेसन की सब्जी
- गुजिया या दही-बड़े
- मालपुआ
भोग लगाने के बाद परिवार के सभी सदस्य एक साथ बैठकर इसे ग्रहण करते हैं। इस भोग से न केवल भौतिक स्वास्थ्य की रक्षा होती है बल्कि मन में सात्विकता और भक्ति की अनुभूति भी होती है।
शीतला सप्तमी का महत्व
शीतला सप्तमी का महत्व सिर्फ भौतिक स्वास्थ्य तक सीमित नहीं है। यह भक्ति, परिवार की एकता और सात्विकता का पर्व भी है। महिलाएं बच्चों और परिवार के लिए व्रत रखकर इस दिन माता शीतला से स्वास्थ्य और लंबी उम्र की कामना करती हैं।
इस पर्व के दौरान पूजा और भोग के नियमों का पालन करना अत्यंत महत्वपूर्ण है, क्योंकि इसे धार्मिक शुद्धता और श्रद्धा के साथ करना आवश्यक है।
Sheetala Saptami 2026 Puja केवल एक धार्मिक परंपरा नहीं है, बल्कि यह स्वास्थ्य, भक्ति और परिवार की सुरक्षा का प्रतीक है। इस दिन माता शीतला की विधिपूर्वक पूजा, मंत्र जाप, भोग अर्पित करना और आरती करना आवश्यक है।
इस बार 10 और 11 मार्च 2026 को शीतला सप्तमी और अष्टमी का पर्व मनाकर आप अपने परिवार को रोगों से सुरक्षित रख सकते हैं और माता शीतला की कृपा का अनुभव कर सकते हैं।
डिस्क्लेमर: यह लेख केवल धार्मिक और जानकारीपूर्ण उद्देश्य के लिए तैयार किया गया है। इसमें दी गई पूजा विधि, मंत्र, आरती और भोग की जानकारी परंपरागत स्रोतों और धार्मिक ग्रंथों पर आधारित है। पाठक अपनी सुविधा और श्रद्धा अनुसार पूजा करें। यह लेख किसी भी चिकित्सा या स्वास्थ्य संबंधी सलाह का विकल्प नहीं है।











